दांडी मार्च वर्षगांठ: भारत ने नमक सत्याग्रह की 96वीं वर्षगांठ मनाई (12 मार्च, 1930)
Aसीधा उत्तर
दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ मनाई; PM मोदी ने NXT समिट में इसे विकसित भारत मिशन से जोड़ा।
मुख्य तथ्य
भारत ने 12 मार्च 2026 को ऐतिहासिक दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ मनाई।
1930 में महात्मा गांधी ने 78 विश्वस्त स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 387 किलोमीटर लंबा मार्च शुरू किया।
6 अप्रैल 1930 को ब्रिटिश नमक एकाधिकार तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।
नमक सत्याग्रह के दौरान 60,000 से अधिक भारतीयों को जेल भेजा गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने एनएक्सटी सम्मेलन में दांडी मार्च और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच समानता बताई।
भारत ने 12 मार्च 2026 को ऐतिहासिक दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ मनाई। 1930 में इसी दिन महात्मा गांधी ने 78 विश्वस्त स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 387 किलोमीटर लंबा मार्च शुरू किया था। 6 अप्रैल 1930 को ब्रिटिश नमक एकाधिकार तोड़कर उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एनएक्सटी सम्मेलन में दांडी मार्च और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच समानता बताई। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1930 के मार्च ने स्वतंत्रता की लड़ाई में देश को एकजुट किया था, उसी तरह वर्तमान अभियान 140 करोड़ भारतीयों को विकास के लिए एकजुट करता है। नमक सत्याग्रह के दौरान 60,000 से अधिक भारतीयों को जेल भेजा गया और यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक बना।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2016 महात्मा गाँधी के आगमन ने किस प्रकार भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन को जन-आंदोलन में रूपान्तरित किया? — यह प्रश्न सीधे परखता है कि गांधी के दांडी मार्च जैसे आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम में जन भागीदारी कैसे बढ़ाई।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दांडी मार्च के महत्व और विकसित भारत अभियान के तहत समकालीन राष्ट्र-निर्माण से इसकी प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने 78 स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 387 किलोमीटर मार्च किया और नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार के विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। 60,000 से अधिक भारतीय गिरफ्तार हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे वर्तमान विकसित भारत अभियान से जोड़ा।
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स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय आंदोलनआधुनिक भारतीय इतिहास
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दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (आत्मनिर्भरता इन पल्सेस) किसने शुरू किया?
व्याख्या · सही उत्तर A
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में एक विशेष कृषि कार्यक्रम के दौरान दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया। केंद्रीय कृषि मंत्री इस मिशन से जुड़े रहे, परंतु इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा किया गया।
12 मार्च 2026 को मनाई गई दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
**दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह)** 12 मार्च 1930 को शुरू हुआ, जब **महात्मा गांधी** ने **78 विश्वस्त स्वयंसेवकों** के साथ **साबरमती आश्रम से दांडी तक 387 किलोमीटर लंबा मार्च** आरंभ किया। उन्होंने 6 अप्रैल 1930 को ब्रिटिश नमक एकाधिकार तोड़कर **सविनय अवज्ञा आंदोलन** की शुरुआत की।
1930 के दांडी मार्च में महात्मा गांधी ने कितनी दूरी तय की और उनके साथ कौन थे?
**महात्मा गांधी** ने **नमक सत्याग्रह (1930)** के दौरान गुजरात में **साबरमती आश्रम से दांडी तक 387 किलोमीटर** की यात्रा की। उनके साथ **78 विश्वस्त स्वयंसेवक (सत्याग्रही)** थे। 24 दिन का यह मार्च 5 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचा।
नमक सत्याग्रह के दौरान कितने भारतीयों को जेल भेजा गया और स्वतंत्रता संग्राम में इसका क्या महत्व था?
**नमक सत्याग्रह** के दौरान **60,000 से अधिक भारतीयों को जेल भेजा गया**। यह पहला व्यापक सविनय अवज्ञा आंदोलन था, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की ओर विश्व का ध्यान खींचा, अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति दिखाई और ब्रिटिश औपनिवेशिक कानून को सीधी चुनौती दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने एनएक्सटी सम्मेलन में दांडी मार्च और विकसित भारत के बीच क्या समानता बताई?
**प्रधानमंत्री मोदी** ने 12 मार्च 2026 को **एनएक्सटी सम्मेलन** में कहा कि **1930 के दांडी मार्च** ने स्वतंत्रता की लड़ाई में देश को एकजुट किया था, जबकि वर्तमान **विकसित भारत अभियान** 2047 तक विकास का लक्ष्य हासिल करने के लिए **140 करोड़ भारतीयों** को एकजुट करता है।
महात्मा गांधी ने दांडी में नमक कानून कब तोड़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक शुरुआत कब हुई?
**महात्मा गांधी** ने **6 अप्रैल 1930** को दांडी में नमक कानून तोड़ा और औपचारिक रूप से **सविनय अवज्ञा आंदोलन** शुरू किया। उन्होंने समुद्र से मुट्ठी भर नमक उठाकर नमक के उत्पादन और उस पर कर लगाने के ब्रिटिश एकाधिकार का उल्लंघन किया, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।
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