प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक वर्षीय राष्ट्रीय स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। यह गीत 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। उद्घाटन कार्यक्रम नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिष्ठित गायकों की प्रस्तुतियाँ, स्मारक डाक टिकट और सिक्के का विमोचन तथा स्वतंत्रता संग्राम में गीत की भूमिका को रेखांकित करने वाली प्रदर्शनियाँ शामिल थीं। 'वंदे मातरम' पहली बार चट्टोपाध्याय के 1882 के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था और स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरणास्रोत बना। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ राष्ट्रगीत के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर को राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक वर्षीय राष्ट्रीय स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। यह गीत 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। उद्घाटन कार्यक्रम नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिष्ठित गायकों की प्रस्तुतियाँ, स्मारक डाक टिकट और सिक्के का विमोचन तथा स्वतंत्रता संग्राम में गीत की भूमिका दिखाने वाली प्रदर्शनियाँ शामिल थीं। 'वंदे मातरम' पहली बार चट्टोपाध्याय के 1882 के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था और स्वतंत्रता आंदोलन में प्रेरणास्रोत बना। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ राष्ट्रगीत के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई।
मुख्य तथ्य
- प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर 2025 को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का वर्षभर का स्मरणोत्सव शुरू किया।
- राष्ट्रगीत 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था।
- उद्घाटन कार्यक्रम नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
- 150वीं वर्षगांठ पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया गया।
- 'वंदे मातरम' पहली बार चट्टोपाध्याय के 1882 के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ।
- 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'वंदे मातरम' मूल रूप से कब, किसने और किस अवसर पर लिखा था?
'वंदे मातरम' 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका 'बंगदर्शन' में प्रकाशित हुआ और बाद में 1882 के 'आनंदमठ' में शामिल हुआ।
'वंदे मातरम' को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में आधिकारिक मान्यता कब और किसने दी?
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी — संविधान लागू होने से एक दिन पहले। इसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान सम्मान प्राप्त है।
7 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के उद्घाटन अवसर पर कौन-से आयोजन हुए?
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में एक वर्षीय स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित गायकों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्मारक डाक टिकट और सिक्के का विमोचन तथा स्वतंत्रता संग्राम में गीत की भूमिका दिखाने वाली प्रदर्शनियाँ शामिल थीं।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
'वंदे मातरम' भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक शक्तिशाली प्रेरणास्रोत था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रबींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार गाया और इसके बोलों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ने वाले क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया।
'वंदे मातरम' किस उपन्यास में पहली बार प्रकाशित हुआ और इसका साहित्यिक महत्व क्या है?
'वंदे मातरम' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के 1882 के बांग्ला उपन्यास 'आनंदमठ' में पहली बार प्रकाशित हुआ, जिसमें औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक काल्पनिक सशस्त्र विद्रोह दिखाया गया है। यह गीत राष्ट्रीय जागरण का प्रतीक बन गया और अपनी साहित्यिक उत्पत्ति से आगे बढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन का राष्ट्रगान बना।
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