प्रकाशित: 22 मार्च 2026DD News / PMIndia.gov.in / ANIटॉपिक
शहीद दिवस 2026: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत की 95वीं वर्षगाँठ पर राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि
23 मार्च 2026 को भारत ने शहीद दिवस — शहादत दिवस — मनाया। यह तीन प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानियों — भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु और सुखदेव थापर — की 95वीं शहादत वर्षगाँठ थी। इन्हें 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता द्वारा फाँसी दी गई थी — निर्धारित तिथि से एक दिन पहले, कथित रूप से सार्वजनिक विरोध से बचने के लिए। तीनों हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के चिरस्थायी प्रतीक बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा: "आज हम भारत माता के वीर पुत्रों के प्रति श्रद्धा से झुकते हैं। उनकी शहादत हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। युवावस्था में ही उन्होंने असाधारण साहस और भारत की स्वतंत्रता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई।"
भगत सिंह, जो फाँसी के समय केवल 23 वर्ष के थे, 1929 में केंद्रीय विधान सभा बमकांड (बटुकेश्वर दत्त के साथ — विरोध के प्रतीक के रूप में, हताहत के इरादे से नहीं), जेल में राजनीतिक कैदियों के समान व्यवहार की माँग पर भूख हड़ताल, और 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' जैसे लेखों से सुप्रसिद्ध हुए। राजस्थान का संबंध केसरी सिंह बारहठ और अर्जुन लाल सेठी जैसे क्रांतिकारियों के ज़रिए HSRA की विचारधारा से जुड़ता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: शहीद दिवस 2026 पर स्मरण की गई भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की क्रांतिकारी विरासत पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
23 मार्च 2026 को शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की लाहौर सेंट्रल जेल में फाँसी की 95वीं वर्षगाँठ मनाई गई, जो विरोध रोकने के लिए एक दिन पहले दी गई थी। एचएसआरए सदस्य के रूप में उन्होंने क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का समर्थन किया। भगत सिंह के 1929 विधानसभा बमकांड, जेल भूख हड़ताल और समाजवादी लेखन ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को गहराई से प्रभावित किया।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
23 मार्च को मनाए जाने वाले शहीद दिवस के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह 23 मार्च 1931 को लाहौर में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फाँसी की स्मृति में मनाया जाता है।
2. तीनों भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की युवा शाखा के सदस्य थे।
3. भगत सिंह ने फाँसी की प्रतीक्षा के दौरान कारावास में ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ लिखा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Cकथन 1 सही है: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में फाँसी दी गई, निर्धारित तिथि से एक दिन पहले। कथन 2 गलत है: तीनों हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे, न कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के। वे क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की एक अलग धारा का प्रतिनिधित्व करते थे। कथन 3 सही है: भगत सिंह ने अक्टूबर 1930 में लाहौर सेंट्रल जेल में प्रसिद्ध निबंध 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' लिखा था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को कब और कहाँ फाँसी दी गई और 2026 में क्या महत्व है?
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च 1931 को लाहौर केंद्रीय जेल में फाँसी दी गई। 23 मार्च 2026 इन तीन क्रांतिकारियों की 95वीं शहादत वर्षगाँठ (शहीद दिवस) है।
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) क्या थी और इसके संस्थापक कौन थे?
HSRA एक क्रांतिकारी संगठन था, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के पक्ष में था। इसकी स्थापना चंद्रशेखर आज़ाद ने की थी। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव इसके प्रमुख सदस्य थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ चर्चित कार्रवाइयाँ कीं।
स्वतंत्रता संग्राम में भगत सिंह के दो प्रमुख कार्य कौन से थे?
भगत सिंह के दो ऐतिहासिक कार्य थे: (1) 1929 में केंद्रीय असेंबली बम कांड — जिसमें उन्होंने और बटुकेश्वर दत्त ने दमनकारी कानूनों के विरोध में दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में बम फेंके और जानबूझकर गिरफ्तारी दी; तथा (2) 1928 में सॉन्डर्स हत्याकांड — लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए, जो पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद चल बसे थे।
राजस्थान में विशेष रूप से 30 मार्च को शहीद दिवस क्यों मनाया जाता है?
राजस्थान में 30 मार्च को शहीद दिवस 1948 के जयपुर गोलीकांड के शहीदों की स्मृति में मनाया जाता है, जब जयपुर रियासत के भारतीय संघ में विलय की माँग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर तत्कालीन रियासत की सेना ने गोलियाँ चलाई थीं। यह 23 मार्च के राष्ट्रीय शहीद दिवस से अलग है।
RPSC RAS परीक्षा की तैयारी के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्यों हैं?
ये क्रांतिकारी RAS प्रारंभिक GS पेपर (आधुनिक भारतीय इतिहास) और मुख्य परीक्षा पेपर-I के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रश्न अक्सर HSRA, 1929 असेंबली बम कांड, लाहौर षड्यंत्र केस और राजस्थान-विशिष्ट 30 मार्च शहीद दिवस की जानकारी परखते हैं। इनकी विरासत भारत की राष्ट्रीय पहचान पर प्रश्नों के लिए भी प्रासंगिक है।