ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025, जो 2026 की शुरुआत में जारी हुआ और जिसका मार्च 2026 के अंत में The Hindu के संपादकीय में विश्लेषण किया गया, यह बताता है कि वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार पर काबू पाने की स्थिति रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गई है — वैश्विक औसत अंक 42 हो गया (0-100 पैमाने पर, जहाँ 100 = बिल्कुल स्वच्छ), जो 1995 में CPI की माप शुरू होने के बाद से सबसे खराब है।

भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर रहा — स्कोर 39, जो पिछले वर्ष से 1 अंक अधिक है। देश वैश्विक औसत से नीचे प्रदर्शन कर रहा है।

प्रमुख वैश्विक निष्कर्ष:

  • डेनमार्क पहले स्थान पर (स्कोर: 89), उसके बाद फिनलैंड, सिंगापुर और न्यूजीलैंड
  • दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम — व्यापक भ्रष्टाचार का संकेत
  • 42 का वैश्विक औसत 1995 के बाद से सबसे निचला स्तर
  • सत्तावादी शासन और संघर्ष क्षेत्रों में सबसे तेज गिरावट

भारत के लिए निहितार्थ:

1. राज्य स्तर पर सेवा वितरण में नौकरशाही भ्रष्टाचार की चुनौती

2. राजनीतिक वित्त पारदर्शिता में सुधार की आवश्यकता

3. न्यायिक स्वतंत्रता और भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत करने की जरूरत

4. दक्षिण एशिया में बांग्लादेश (23) और पाकिस्तान (27) से बेहतर प्रदर्शन

राजस्थान प्रासंगिकता: राजस्थान सार्वजनिक सेवाओं का अधिकार अधिनियम (RTPS), सिंगल-विंडो क्लियरेंस, राजस्थान लोकायुक्त भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग संबंधी शिकायतों की जांच के लिए स्थापित वैधानिक स्वतंत्र संस्था है।