प्रकाशित: 14 मार्च 2026BIS / PIB / Testcoach.inशासन
BIS सोने की हॉलमार्किंग चरण VI: राजस्थान के ब्यावर सहित 380 जिलों तक विस्तार
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2 मार्च 2026 से अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग के चरण VI को लागू किया, जिसमें राजस्थान के ब्यावर, बिहार के कटिहार और उत्तर प्रदेश के बांदा सहित सात नए जिलों को जोड़ा गया। इस चरण के साथ, HUID (हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन) प्रणाली के तहत अनिवार्य हॉलमार्किंग अब भारत के 380 जिलों में लागू है।
सोने की हॉलमार्किंग भारत में बिकने वाले सोने के आभूषणों की शुद्धता को प्रमाणित करती है। 2021 में शुरू की गई HUID-आधारित प्रणाली के तहत प्रत्येक आभूषण पर छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है, जिसे BIS Care ऐप पर जाँचा जा सकता है। यह योजना उपभोक्ताओं को सोने की शुद्धता से जुड़ी मिलावट और भ्रामक दावों से बचाती है।
राजस्थान के लिए ब्यावर का शामिल होना महत्वपूर्ण है। ब्यावर जिले में स्थित ब्यावर राजस्थान का एक प्रमुख व्यापारिक नगर है। हॉलमार्किंग विस्तार त्योहारों और शादी के मौसम में सोना खरीदने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को शुद्धता से जुड़ी धोखाधड़ी से बचाता है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: राजस्थान के ब्यावर के संदर्भ में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा चरण छह में 380 जिलों तक एचयूआईडी के तहत अनिवार्य स्वर्ण हॉलमार्किंग के विस्तार के महत्व का परीक्षण करें।
उत्तर (50 शब्द):
2 मार्च 2026 से भारतीय मानक ब्यूरो के चरण छह ने राजस्थान के ब्यावर को जोड़कर अनिवार्य एचयूआईडी आधारित स्वर्ण हॉलमार्किंग 380 जिलों तक विस्तारित की। प्रत्येक आभूषण पर छह अंकों का अद्वितीय कोड होता है, जिसे बीआईएस केयर ऐप पर सत्यापित किया जा सकता है; इससे अनुमानित 300 टन वार्षिक अनौपचारिक स्वर्ण बाज़ार को दायरे में लाने का प्रयास है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
बीआईएस चरण VI स्वर्ण हॉलमार्किंग, जो 2 मार्च 2026 से प्रभावी है, के तहत भारत में अनिवार्य हॉलमार्किंग अब कितने जिलों में लागू है?
व्याख्या · सही उत्तर B2 मार्च 2026 को बीआईएस चरण VI में बेआवर (राजस्थान) सहित सात नए जिले जुड़ने के बाद, अनिवार्य HUID-आधारित हॉलमार्किंग अब भारत के 380 जिलों में लागू है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
HUID क्या है और यह भारत में सोने के उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
HUID का अर्थ है हॉलमार्क विशिष्ट पहचान — BIS-पंजीकृत परख केंद्र सोने के आभूषणों पर लेजर से यह 6-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड उत्कीर्ण करते हैं। इससे उपभोक्ता और नियामक सोने की शुद्धता व प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकते हैं, और खरीदार मिलावट व गलत दावों से बचते हैं।
BIS सोने की अनिवार्य हॉलमार्किंग का चरण VI कब से लागू हुआ और अब यह कितने जिलों में है?
अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग का चरण VI 2 मार्च 2026 से लागू हुआ। इससे भारत में इसका दायरा 380 जिलों तक बढ़ गया, जिसमें राजस्थान के ब्यावर सहित 7 नए जिले जोड़े गए।
भारत में अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग पहली बार कब शुरू हुई और BIS किस मंत्रालय के अधीन काम करता है?
भारत में अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग पहली बार जून 2021 में चरण I के रूप में शुरू हुई। BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और भारत का राष्ट्रीय गुणवत्ता व मानक प्रमाणन निकाय है।
अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग के चरण VI में राजस्थान का कौन-सा जिला नया शामिल हुआ?
राजस्थान का ब्यावर BIS की अनिवार्य सोने की हॉलमार्किंग के चरण VI (2 मार्च 2026 से) में शामिल 7 नए जिलों में से एक था। ब्यावर अपने जिले का प्रमुख व्यावसायिक नगर है, जो वस्त्र और आभूषण व्यापार के लिए जाना जाता है।
BIS हॉलमार्किंग योजना सोने के आभूषण खरीदते समय उपभोक्ताओं की रक्षा कैसे करती है?
BIS हॉलमार्किंग योजना में शामिल जिलों में बिकने वाले सभी सोने के आभूषणों पर HUID कोड अंकित होना अनिवार्य है, जो उनकी शुद्धता (जैसे 22 कैरेट या 18 कैरेट) प्रमाणित करता है। इससे जौहरी कम शुद्धता के सोने को अधिक शुद्ध बताकर नहीं बेच पाते और उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी के विरुद्ध कानूनी सहारा मिलता है।