FY2025-26 के अप्रैल-फरवरी में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा $10,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर लगभग $10,200 करोड़ तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल API, मशीनरी और औद्योगिक घटकों के लिए भारत अब भी चीनी आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। मेक इन इंडिया और PLI योजनाओं के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के बावजूद यह घाटा लगातार चुनौती बना हुआ है। विश्लेषकों ने कहा कि भारत ने मोबाइल असेंबली जैसे क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम की है, लेकिन कुल आयात खर्च बढ़ता जा रहा है।