एक उच्च स्तरीय अमेरिकी रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना के लिए छह अतिरिक्त P-8I पोसाइडन समुद्री गश्त विमानों के लिए 4 अरब डॉलर के सौदे को अंतिम रूप देने के लिए 16-19 सितंबर 2025 के बीच नई दिल्ली का दौरा किया। भारत पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध और निगरानी के लिए 12 P-8I विमान संचालित करता है। इस सौदे को चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के विरुद्ध एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-अमेरिका के बीच छह अतिरिक्त P-8I समुद्री गश्त विमानों के लिए 4 अरब डॉलर के सौदे पर सहमति करीब
एक उच्च स्तरीय अमेरिकी रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना के लिए छह अतिरिक्त P-8I पोसाइडन समुद्री गश्ती विमानों के 4 अरब डॉलर के सौदे को अंतिम रूप देने के लिए 16-19 सितंबर 2025 के बीच नई दिल्ली का दौरा किया। भारत पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध और निगरानी के लिए 12 P-8I विमान संचालित करता है। इस सौदे को चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के विरुद्ध एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य तथ्य
- भारत और अमेरिका छह अतिरिक्त P-8I पोसाइडन विमानों के लिए $4 अरब के सौदे के करीब हैं।
- अमेरिकी रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने 16-19 सितंबर 2025 को सौदे को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली का दौरा किया।
- भारत पहले से पनडुब्बी-रोधी युद्ध और समुद्री निगरानी के लिए 12 P-8I संचालित करता है।
- P-8I बोइंग द्वारा निर्मित लंबी दूरी का बहुउद्देश्यीय समुद्री गश्ती विमान है।
- यह सौदा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा।
- यह DTTI ढाँचे के तहत भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के गहराने को दर्शाता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
हिन्द महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए भारत वर्तमान में कितने पी-8आई समुद्री गश्ती विमान संचालित करता है?
बोइंग ने फरवरी 2022 में भारत को 12वां P-8I विमान दिया था। P-8I भारतीय नौसेना का लंबी दूरी का समुद्री टोही और पनडुब्बी-रोधी युद्धक विमान है, इसलिए इस प्रश्न में सही संख्या 12 है।
स्रोत: BusinessToday / IDRW
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
P-8I पोसाइडन विमान क्या है और भारत इसे क्यों खरीद रहा है?
P-8I पोसाइडन बोइंग द्वारा निर्मित एक लंबी दूरी का बहु-मिशन समुद्री गश्ती विमान है, जिसे खास भारत के लिए तैयार किया गया है। यह पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW), समुद्री निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए बना है। भारत छह अतिरिक्त P-8I खरीद रहा है ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी निगरानी और निरोधक क्षमता मजबूत कर सके, जहाँ चीन की नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। भारत पहले से 12 P-8I विमान चला रहा है और यह नया सौदा — करीब $4 अरब का — कुल बेड़े को 18 तक पहुँचा देगा।
DTTI क्या है और P-8I सौदा इससे कैसे जुड़ा है?
रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (DTTI) 2012 में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को गति देने के लिए शुरू की गई द्विपक्षीय रूपरेखा है। इसका लक्ष्य पारंपरिक खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे जाकर संयुक्त विकास और निर्माण की ओर बढ़ना है। P-8I सौदा DTTI के तहत गहराती साझेदारी को दर्शाता है। DTTI में विमानवाहक पोत प्रौद्योगिकी, जेट इंजन विकास और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति का क्या महत्व है और P-8I विमान इसमें कैसे सहायक हैं?
हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है — दुनिया का लगभग 80% तेल व्यापार इसी से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे IOR का स्वाभाविक सुरक्षा प्रदाता बनाती है। चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति — पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में बंदरगाहों के जरिए — एक रणनीतिक चुनौती है। P-8I अपनी 2,200+ किमी लंबी दूरी की निगरानी क्षमता से पूरे IOR में पनडुब्बियों और सतही पोतों की आवाजाही पर नजर रख सकता है।
सितंबर 2025 की अमेरिकी रक्षा प्रतिनिधिमंडल यात्रा में P-8I के अलावा किस और उपकरण पर चर्चा हुई?
सितंबर 2025 में नई दिल्ली की यात्रा (16–19 सितंबर) के दौरान भारतीय नौसेना के लिए P-8I सौदे के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के लिए CH-47F चिनूक हेलीकॉप्टरों पर भी चर्चा हुई। चिनूक एक भारी-भरकम टैंडम रोटर हेलीकॉप्टर है, जिसका उपयोग सैनिकों के परिवहन, तोपखाने की तैनाती और ऊंचाई वाले इलाकों में मानवीय ऑपरेशन के लिए होता है — इसलिए यह हिमालयी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंध भारत की पारंपरिक रक्षा साझेदारियों की तुलना में कहाँ खड़े हैं?
ऐतिहासिक रूप से भारत रक्षा उपकरणों के लिए रूस पर बहुत निर्भर रहा है। लेकिन LEMOA (2016), COMCASA (2018) और BECA (2020) जैसे मूलभूत समझौतों के बाद भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी काफी गहरी हुई है। P-8I सौदा (~$4 अरब) भारत-अमेरिका के सबसे बड़े रक्षा लेनदेन में से एक है और यह भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' के सिद्धांत को दर्शाता है — रूस और अमेरिका दोनों के साथ स्वतंत्र संबंध बनाए रखना।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें