अक्टूबर 2025 में MNRE ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन प्रमुख बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दी: दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (तमिलनाडु), और पारादीप पोर्ट प्राधिकरण (ओडिशा)। अगस्त 2025 तक 158 ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ विकास के अलग-अलग चरणों में थीं। हालांकि, नियोजित क्षमता का केवल 2.8% ही चालू हुआ है। अप्रैल 2025 में ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना शुरू की गई। भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन है।
भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: तीन बंदरगाह हब की घोषणा
अक्टूबर 2025 में तीन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब नामित किया गया; 158 परियोजनाओं में से केवल 2.8% ही परिचालन में हैं।
मुख्य तथ्य
- MNRE ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन प्रमुख बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में मान्यता दी: Deendayal बंदरगाह (Gujarat), V.O. Chidambaranar बंदरगाह (Tamil Nadu) और Paradip बंदरगाह (Odisha)
- 158 हरित हाइड्रोजन परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में हैं; इनमें 19 कंपनियों को 8,62,000 टन वार्षिक क्षमता आवंटित की गई है।
- अक्टूबर 2025 तक नियोजित क्षमता का केवल 2.8% ही चालू हो पाया है
- अप्रैल 2025 में हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना शुरू की गई
- भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन करना है
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्य क्या हैं? — दोनों राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की कार्यान्वयन प्रगति और बंदरगाह-आधारित हाइड्रोजन अवसंरचना को संबोधित करते हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: तीन बंदरगाह हबों और आवंटित क्षमता एवं परिचालन उत्पादन के अंतर के संदर्भ में भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की प्रगति का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
एमएनआरई ने अक्टूबर 2025 में दीनदयाल बंदरगाह (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (तमिलनाडु) और पारादीप बंदरगाह (ओडिशा) को हरित हाइड्रोजन हब नामित किया। 158 परियोजनाओं में 19 कंपनियों को 8,62,000 टन वार्षिक क्षमता और 15 फर्मों को 3,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता मिली, फिर भी मात्र 2.8 प्रतिशत ही परिचालन में है, जो गंभीर कार्यान्वयन चुनौतियाँ दर्शाता है।
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राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति 2025 के अनुसार भारत की अनुमानित सैद्धांतिक भू-तापीय संसाधन क्षमता कितनी है?
GSI ने 381 गर्म झरनों और ~10,600 MW भू-तापीय क्षमता की पहचान की; MNRE ने 15 सितंबर 2025 को नीति अधिसूचित की।
स्रोत: MNRE
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत कौन से तीन बंदरगाह ग्रीन हाइड्रोजन हब घोषित किए गए?
MNRE ने तीन प्रमुख बंदरगाहों को **ग्रीन हाइड्रोजन हब** के रूप में मान्यता दी: **दीनदयाल बंदरगाह (गुजरात), वीओ चिदंबरनार बंदरगाह (तमिलनाडु) और पारादीप बंदरगाह (ओडिशा)**।
अगस्त 2025 तक भारत में हरित हाइड्रोजन की कितनी परियोजनाएं विकास में थीं?
अगस्त 2025 तक **158 हरित हाइड्रोजन परियोजनाएं** विकास के अलग-अलग चरणों में थीं। **19 कंपनियों को 8,62,000 टन वार्षिक क्षमता** और **15 कंपनियों को 3,000 MW इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता** आवंटित की गई, लेकिन योजना में रखी गई क्षमता का केवल **2.8%** ही चालू था।
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य क्या है?
भारत के **राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन** का लक्ष्य 2030 तक हर साल **50 लाख मेट्रिक टन हरित हाइड्रोजन** उत्पादन करना है। मिशन का लक्ष्य **$8 अरब निवेश** आकर्षित करना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना भी है।
हरित हाइड्रोजन हब बनाने वाले तीन बंदरगाह किन राज्यों में हैं?
तीनों बंदरगाह अलग-अलग राज्यों में हैं: **दीनदयाल बंदरगाह — गुजरात**, **वीओ चिदंबरनार बंदरगाह — तमिलनाडु**, और **पारादीप बंदरगाह — ओडिशा**।
भारत में हरित हाइड्रोजन की नियोजित क्षमता का केवल 2.8% ही चालू क्यों है?
158 परियोजनाएं विकासाधीन होने के बावजूद केवल **2.8% नियोजित क्षमता** चालू है, क्योंकि **इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, वित्तपोषण और बुनियादी ढांचे** में बड़ी चुनौतियां हैं। तीन बंदरगाह हब इन्हीं समस्याओं को हल करने में मदद करेंगे।
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