प्रकाशित: 8 फ़रवरी 2026DSTविज्ञान-प्रौद्योगिकी
भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम शुरू; ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 IITs के बीच MoU पर हस्ताक्षर
6 फरवरी 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने 'भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम' शुरू किया और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड्स) तथा 19 IITs के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। यह कार्यक्रम हरित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और फ्यूल सेल प्रौद्योगिकियों में सहयोगी अनुसंधान को गति देने के लिए है।
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रति वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके लिए ₹8 लाख करोड़ का निवेश आवश्यक है। नीदरलैंड्स इलेक्ट्रोलाइसिस प्रौद्योगिकी और बंदरगाह-आधारित हाइड्रोजन लॉजिस्टिक्स में विश्व में अग्रणी है।
राजस्थान के मरुस्थलीय सौर गलियारे में इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और हरित अमोनिया की पायलट परियोजनाएं चल रही हैं। राज्य की विशाल सौर क्षमता इसे हरित हाइड्रोजन उत्पादन का प्राकृतिक केंद्र बनाती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फ़ेलोशिप कार्यक्रम राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन में कैसे योगदान देता है और द्विपक्षीय अनुसंधान सहयोग के लिए इसका क्या रणनीतिक महत्व है?
उत्तर (50 शब्द):
डीएसटी द्वारा शुरू की गई यह फ़ेलोशिप ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 IIT के साथ संयुक्त पीएचडी कार्यक्रम, संकाय विनिमय और हाइड्रोजन प्रदर्शन परियोजनाओं को संभव बनाती है। यह 2030 तक प्रतिवर्ष 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन के भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाती है, जिसके लिए 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है और नीदरलैंड की इलेक्ट्रोलिसिस विशेषज्ञता से लाभ मिलता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम 6 फरवरी 2026 को भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा शुरू किया गया। इसका उद्देश्य ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 IITs के बीच हुए MoU के ज़रिए भारत-नीदरलैंड्स के साझा हरित हाइड्रोजन अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इस फेलोशिप से संयुक्त अनुसंधान, आदान-प्रदान कार्यक्रम और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को गति मिलेगी।
भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के प्रमुख लक्ष्य क्या हैं?
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन (5 MMT) हरित हाइड्रोजन का वार्षिक उत्पादन करना है। इसके लिए ₹8 लाख करोड़ के कुल निवेश और 6 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही भारत को हरित हाइड्रोजन और हाइड्रोजन-आधारित ईंधन का दुनिया का अग्रणी निर्यातक बनाना भी इसका लक्ष्य है।
हरित हाइड्रोजन कैसे बनाई जाती है और इसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत क्यों माना जाता है?
हरित हाइड्रोजन विद्युत अपघटन से बनाई जाती है — सौर या पवन ऊर्जा से पैदा बिजली की मदद से पानी (H₂O) को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। चूँकि इस प्रक्रिया में किसी जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं होता, इसलिए कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। इसी कारण यह ग्रे हाइड्रोजन (प्राकृतिक गैस से) और ब्लू हाइड्रोजन (कार्बन कैप्चर सहित प्राकृतिक गैस से) का स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प बनती है।
भारत के हरित हाइड्रोजन अनुसंधान के लिए ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण साझेदार क्यों है?
नीदरलैंड्स का ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय यूरोप के प्रमुख शोध विश्वविद्यालयों में गिना जाता है और ऊर्जा संक्रमण, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी तथा टिकाऊ रसायन विज्ञान में इसकी मजबूत विशेषज्ञता है। नीदरलैंड्स हरित हाइड्रोजन बुनियादी ढाँचे में विश्व स्तर पर अग्रणी है, इसलिए ग्रोनिंगन 19 IITs के साथ संयुक्त अनुसंधान और छात्र आदान-प्रदान के ज़रिए उन्नत विद्युत अपघटन तथा ईंधन सेल प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए आदर्श साझेदार है।
RPSC परीक्षा में भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम की क्या प्रासंगिकता है?
यह विषय विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अंतर्गत RPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए प्रासंगिक है। मुख्य बिंदु हैं: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के 2030 लक्ष्य (5 MMT उत्पादन, ₹8 लाख करोड़ निवेश, 6 लाख रोजगार); विद्युत अपघटन से तैयार शून्य उत्सर्जन वाला ईंधन; नीदरलैंड्स के साथ भारत का वैज्ञानिक सहयोग; और राजस्थान की विशाल सौर ऊर्जा क्षमता के कारण हरित हाइड्रोजन उत्पादन में उसकी संभावित अग्रणी भूमिका।