6 फरवरी 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने 'भारत-नीदरलैंड्स हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम' शुरू किया और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड्स) तथा 19 IITs के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। यह कार्यक्रम हरित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और फ्यूल सेल प्रौद्योगिकियों में सहयोगी अनुसंधान को गति देने के लिए है।

भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रति वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके लिए ₹8 लाख करोड़ का निवेश आवश्यक है। नीदरलैंड्स इलेक्ट्रोलाइसिस प्रौद्योगिकी और बंदरगाह-आधारित हाइड्रोजन लॉजिस्टिक्स में विश्व में अग्रणी है।

राजस्थान के मरुस्थलीय सौर गलियारे में इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और हरित अमोनिया की पायलट परियोजनाएं चल रही हैं। राज्य की विशाल सौर क्षमता इसे हरित हाइड्रोजन उत्पादन का प्राकृतिक केंद्र बनाती है।