संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) ने 19 जनवरी 2026 को जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि को औपचारिक पत्र लिखकर असम में बंगाली मुस्लिमों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव पर गंभीर चिंता जताई। समिति ने मनमानी हिरासत, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) प्रक्रिया से राज्यहीनता का जोखिम और विदेशी न्यायाधिकरणों के भेदभावपूर्ण क्रियान्वयन जैसे मुद्दे उठाए। CERD की स्थापना भारत द्वारा अनुमोदित ICERD के तहत हुई है। असम NRC प्रक्रिया में लगभग 19.06 लाख व्यक्तियों को अंतिम सूची से बाहर रखा गया था। यह मुद्दा RPSC RAS उम्मीदवारों के लिए भारतीय संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 5-11), NRC और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
CERD ने असम में बंगाली मुस्लिमों के साथ भेदभाव पर चिंता जताई; भारत का नागरिकता और NRC ढाँचा अंतर्राष्ट्रीय जाँच के दायरे में
संयुक्त राष्ट्र नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) ने 19 जनवरी 2026 को जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर असम में बंगाली मुस्लिमों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव पर गंभीर चिंता जताई। समिति ने मनमानी हिरासत, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) प्रक्रिया से राज्यहीनता के जोखिम और विदेशी न्यायाधिकरणों के भेदभावपूर्ण क्रियान्वयन जैसे मुद्दे उठाए। CERD की स्थापना ICERD के तहत हुई है, जिसका भारत ने अनुसमर्थन किया है। असम NRC प्रक्रिया में लगभग 19.06 लाख व्यक्तियों को अंतिम सूची से बाहर रखा गया था। यह मुद्दा RPSC RAS उम्मीदवारों के लिए भारतीय संवैधानिक कानून (अनुच्छेद 5-11), NRC और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
मुख्य तथ्य
- CERD ने 19 जनवरी 2026 को असम में बंगाली मुस्लिमों के साथ भेदभाव पर भारत को पत्र लिखा।
- मनमानी हिरासत और NRC प्रक्रिया से राज्यहीनता के खतरे जैसे मुद्दे उठाए गए।
- असम NRC (अगस्त 2019 में सम्पन्न) ने लगभग 19.06 लाख व्यक्तियों को अंतिम सूची से बाहर रखा।
- CAA 2024 उत्पीड़ित गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता पाने का रास्ता देता है, लेकिन मुसलमानों को बाहर रखता है।
- भारत ने नागरिकता निर्धारण का संप्रभु अधिकार जताया और NRC की न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दिया।
- यह RPSC RAS प्रश्न-पत्र-II के अनुच्छेद 5-11 (नागरिकता) और NRC विषय के लिए प्रासंगिक है।
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अगस्त 2019 में सम्पन्न असम की अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) सूची से लगभग कितने व्यक्ति बाहर किए गए?
लेख में निर्दिष्ट है कि अगस्त 2019 में सम्पन्न असम में एनआरसी प्रक्रिया ने अंतिम सूची से लगभग 19.06 लाख व्यक्तियों को बाहर रखा।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CERD क्या है और उसने जनवरी 2026 में असम के संदर्भ में क्या कदम उठाया?
CERD संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति है। यह ICERD (सभी प्रकार के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय) के तहत स्थापित संधि निकाय है, जिसे भारत ने अनुसमर्थित किया है। 19 जनवरी 2026 को CERD ने जिनेवा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि को पत्र लिखकर असम में बंगाली मुस्लिमों के खिलाफ प्रणालीगत भेदभाव पर गंभीर चिंता जताई।
CERD ने असम के संदर्भ में भारत को लिखे पत्र में कौन से विशेष मुद्दे उठाए?
CERD ने तीन मुख्य चिंताएं उठाईं: बंगाली मुस्लिमों की मनमानी हिरासत, असम NRC प्रक्रिया से पैदा हुआ राज्यहीनता का जोखिम, और विदेशी न्यायाधिकरणों का भेदभावपूर्ण कार्यान्वयन। इन्हें ICERD के तहत भारत की बाध्यताओं का उल्लंघन बताया गया।
असम NRC की अंतिम सूची से कितने लोग बाहर हुए और यह प्रक्रिया कब पूरी हुई?
असम NRC प्रक्रिया अगस्त 2019 में पूरी हुई। लगभग 19.06 लाख व्यक्तियों को अंतिम NRC सूची से बाहर रखा गया, यानी उन्हें नागरिक के रूप में मान्यता नहीं मिली और वे राज्यहीनता या हिरासत के जोखिम में हैं।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2024 का CERD की चिंताओं से क्या संबंध है?
CAA 2024 पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उत्पीड़ित गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता पाने का रास्ता देता है। लेकिन इसमें मुसलमानों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है, इसलिए CERD ने भेदभावपूर्ण व्यवहार की चिंता जताई — असम NRC से बाहर हुए मुस्लिमों के लिए नागरिकता का कोई समान रास्ता नहीं है।
CERD की चिंताओं पर भारत का आधिकारिक रुख क्या था और नागरिकता किन संवैधानिक अनुच्छेदों से शासित होती है?
भारत ने नागरिकता निर्धारण को अपना संप्रभु अधिकार बताया और कहा कि NRC प्रक्रिया में उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 संविधान के प्रारंभ के समय नागरिकता को नियंत्रित करते हैं। यह विषय RPSC RAS पेपर-II में शामिल है।
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