सितंबर 2025 में भारत की मुख्य मुद्रास्फीति घटकर 1.5% रह गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 का औसत 4.6% था। यह गिरावट परीक्षा के दृष्टिकोण से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कर नीति, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, खाद्य कीमतों और मौद्रिक नीति के कई हिस्से एक साथ जुड़ते हैं। 22 सितंबर 2025 से लागू GST दरों के युक्तिकरण ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बास्केट के 11.4% हिस्से को प्रभावित किया। आवश्यक वस्तुओं और घरेलू सामान पर कम GST दरों से उपभोक्ता कीमतों पर सीधा असर पड़ा और मुख्य मुद्रास्फीति नीचे आई।

अच्छी मानसूनी फसल भी इस गिरावट का बड़ा कारण रही। खाद्य एवं पेय पदार्थ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बास्केट का सबसे बड़ा घटक है, इसलिए खाद्य कीमतों में नरमी का असर कुल मुद्रास्फीति पर अधिक दिखता है। इसी समय RBI ने रेपो दर 5.50% पर बनाए रखी और अपना नीतिगत रुख तटस्थ रखा। तटस्थ रुख का अर्थ है कि केंद्रीय बैंक के पास आगे की स्थिति के अनुसार दर घटाने या स्थिर रखने की गुंजाइश रहती है।

स्टैटिक जीके में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा मुद्रास्फीति को समझने का प्रमुख आधार है, जबकि रेपो दर RBI की मौद्रिक नीति का मुख्य संकेतक है। प्रीलिम्स में आंकड़े, तारीख और कारण पूछे जा सकते हैं; मुख्य परीक्षा में मुद्रास्फीति नियंत्रण, कर-नीति बदलाव और खाद्य आपूर्ति के प्रभाव पर छोटा विश्लेषण पूछा जा सकता है। यह 8 वर्षों से अधिक समय में भारत की सबसे कम मुद्रास्फीति रीडिंग बताई गई, इसलिए इसे केवल एक मासिक आंकड़े की तरह नहीं, बल्कि राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के संयुक्त प्रभाव के उदाहरण के रूप में पढ़ना चाहिए।