भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 3–5 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में नीति रेपो दर में 25 आधार अंक (bps) की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया गया — 5–6 दिसंबर 2025 से तत्काल प्रभाव से। छह में से पाँच MPC सदस्यों ने 'तटस्थ' नीति रुख बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया। 2025 में चार लगातार MPC बैठकों में कुल 125 bps की कटौती हुई — 2019 के बाद RBI का सबसे आक्रामक शिथिलीकरण चक्र। यह निर्णय असाधारण रूप से अनुकूल समष्टि आर्थिक परिस्थितियों में लिया गया: हेडलाइन मुद्रास्फीति रिकॉर्ड निचले स्तर 2.2% तक आ गई — RBI के 4% लक्ष्य (±2% बैंड) से काफी नीचे — जबकि GDP वृद्धि FY2025–26 की पहली छमाही में लगभग 8% और जुलाई–सितंबर 2025 तिमाही में 8.2% रही। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे 'दुर्लभ गोल्डीलॉक्स काल' बताया — जहाँ मुद्रास्फीति और ब्याज दर दोनों स्थितियाँ एक साथ टिकाऊ विकास के लिए अनुकूल हैं। संबंधित दर परिवर्तन: स्थायी जमा सुविधा (SDF) 5.00% और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) तथा बैंक दर 5.50%। रेपो दर में कटौती का असर होम लोन, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण की कम EMI के रूप में दिखने की उम्मीद है। राजस्थान में जयपुर रियल एस्टेट और MSME क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है — विशेष रूप से MUDRA और PM विश्वकर्मा ऋण योजनाओं के तहत ऋण लागत कम होने से जोधपुर और जयपुर के शिल्पकार समूहों को लाभ मिलेगा।