प्रकाशित: 9 फ़रवरी 2026US Consulate/MEAअंतरराष्ट्रीय
बेंगलुरु में अमेरिका-भारत अंतरिक्ष व्यापार फोरम आयोजित; 14 अमेरिकी कंपनियों के 23 अधिकारी शामिल
बेंगलुरु में 10 फरवरी, 2026 को अमेरिका-भारत स्पेस बिज़नेस फोरम का आयोजन किया गया। यह अमेरिकी वाणिज्य विभाग के स्पेस ट्रेड मिशन (9-13 फरवरी, 2026) का हिस्सा था। इस फोरम में 14 प्रमुख अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनियों के 23 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जो द्विपक्षीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग में बढ़ती सक्रियता को दिखाता है।
इस कार्यक्रम में भारत के अंतरिक्ष विभाग के सचिव ने मुख्य भाषण दिया। फोरम में वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं, उपग्रह निर्माण, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष अवसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
2023 में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। IN-SPACe की स्थापना और भारतीय निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप के उभरने से भारत वैश्विक अंतरिक्ष निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन गया है।
यह ट्रेड मिशन अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम है। दोनों देश ARTEMIS समझौतों और द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी समझौतों के तहत पहले भी सहयोग कर चुके हैं। फोरम का उद्देश्य उपग्रहों के सह-उत्पादन, लॉन्च वाहन प्रौद्योगिकी साझाकरण और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधों में ठोस सहयोग के अवसर खोजना था।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अमेरिका-भारत स्पेस बिज़नेस फोरम क्या था और यह कब आयोजित हुआ?
यह 10 फरवरी, 2026 को बेंगलुरु में आयोजित द्विपक्षीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग बैठक थी, जो अमेरिकी वाणिज्य विभाग के स्पेस ट्रेड मिशन (9-13 फरवरी, 2026) का हिस्सा थी। इसमें 14 कंपनियों के 23 अमेरिकी अधिकारी शामिल हुए।
इस बैठक में मुख्य भाषण किसने दिया?
भारत के अंतरिक्ष विभाग के सचिव ने इस बैठक में मुख्य भाषण दिया।
भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
प्रमुख क्षेत्रों में वाणिज्यिक लॉन्च सेवाएं, उपग्रह निर्माण, पृथ्वी अवलोकन, न्यूस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र, ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध शामिल हैं।
IN-SPACe क्या है और यह बैठक के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?
IN-SPACe (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर) की स्थापना 2023 में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के तहत हुई। यह निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खोलता है और भारत को अमेरिकी निवेश के लिए आकर्षक बनाता है।
भारत और अमेरिका किस ढांचे के तहत अंतरिक्ष में सहयोग करते हैं?
भारत और अमेरिका ARTEMIS समझौतों और द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी समझौतों के तहत सहयोग करते हैं; इसलिए यह फोरम उनकी बढ़ती अंतरिक्ष साझेदारी की निरंतरता है।