28–29 मार्च 2026 के आसपास, भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन — जिसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) ने विकसित किया — ने अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) के ऑसिलेशन और इमरजेंसी ब्रेक डिस्टेंस (EBD) परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। ट्रेन ने अधिकतम 70 किमी/घंटा की गति से लगभग 20 किमी का परीक्षण किया। हरियाणा में 90 किमी लंबे जींद–सोनीपत खंड पर यह 110 किमी/घंटा तक की व्यावसायिक गति से चलेगी।

ट्रेनसेट में 10 कोच हैं — 8 यात्री कोच और 2 ड्राइविंग पावर कार — जिनका कुल आउटपुट 2,400 kW है। यह हाइड्रोजन ईंधन कोशिकाओं से बिजली बनाती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प छोड़ती है, इसलिए इसे शून्य-उत्सर्जन हरित परिवहन प्रणाली माना जा रहा है। सफल परीक्षणों के साथ, भारत जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाला विश्व का पाँचवाँ देश बनने की राह पर है।

यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (2021) और रेल मंत्रालय के 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य के अनुरूप है।