18 नवंबर 2025 को भारत के सबसे वांछित नक्सल कमांडर मादवी हिड्मा — CPI (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और PLGA बटालियन कमांडर — को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया गया। उनकी पत्नी मादकम राजे (उर्फ राजक्का) और चार अन्य माओवादी भी मारे गए। हिड्मा पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था और वे छत्तीसगढ़ में कम से कम 26 प्रमुख सशस्त्र हमलों से जुड़े थे — जिनमें अप्रैल 2010 का दंतेवाड़ा नरसंहार (76 CRPF जवान शहीद) और 2013 का दरभा घाटी हमला शामिल हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस ऑपरेशन को वामपंथी उग्रवाद (LWE) के 'ताबूत की आखिरी कील' के रूप में सराहा। यह ऑपरेशन SAMADHAN रणनीति और 2026 तक LWE समाप्त करने के गृह मंत्रालय के विज़न को दर्शाता है।
शीर्ष नक्सल कमांडर मादवी हिड्मा आंध्र प्रदेश मुठभेड़ में मारा गया: माओवादी विद्रोह को बड़ा झटका
18 नवंबर 2025 को भारत के सबसे वांछित नक्सल कमांडर मादवी हिड्मा — CPI (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और PLGA बटालियन कमांडर — को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया गया। उनकी पत्नी मादकम राजे (उर्फ राजक्का) और चार अन्य माओवादी भी मारे गए। हिड्मा पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था और वे छत्तीसगढ़ में कम से कम 26 प्रमुख सशस्त्र हमलों से जुड़े थे — जिनमें अप्रैल 2010 का दंतेवाड़ा नरसंहार (76 CRPF जवान शहीद) और 2013 का दरभा घाटी हमला शामिल हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस ऑपरेशन को वामपंथी उग्रवाद (LWE) के 'ताबूत की आखिरी कील' बताया। यह ऑपरेशन SAMADHAN रणनीति और 2026 तक LWE समाप्त करने के गृह मंत्रालय के लक्ष्य को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- शीर्ष नक्सल कमांडर मादवी हिड्मा 18 नवंबर 2025 को मुठभेड़ में मारा गया।
- वह CPI(माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य था और उस पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था।
- मुठभेड़ आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन में हुई।
- हिड्मा 2010 के दंतेवाड़ा नरसंहार (76 CRPF जवान शहीद) सहित 26 प्रमुख हमलों से जुड़ा था।
- यह ऑपरेशन 2026 तक LWE को समाप्त करने की SAMADHAN रणनीति को दिखाता है।
- NIA ने हिड्मा को UAPA के तहत विशेष नामित आतंकवादी घोषित किया था।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: समाधान रणनीति के तहत नक्सल कमांडर मादवी हिड्मा के मारे जाने का भारत की वामपंथी उग्रवाद विरोधी नीति के लिए क्या महत्व है? मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
18 नवंबर 2025 को भाकपा(माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य मादवी हिड्मा अल्लूरी सीताराम राजू जिले में मुठभेड़ में मारा गया। 1 करोड़ रुपये से अधिक के इनामी हिड्मा 2010 के दंतेवाड़ा हमले सहित 26 हमलों से जुड़ा था, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए। यह 2026 तक वामपंथी उग्रवाद खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में अहम है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मादवी हिड्मा कौन था और माओवादी विद्रोह में उसकी क्या भूमिका थी?
मादवी हिड्मा CPI (माओवादी) का शीर्ष कमांडर था — वह केंद्रीय समिति का सदस्य और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) का बटालियन कमांडर था। उस पर ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था और वह भारत का सबसे वांछित नक्सली था। वह कम से कम 26 प्रमुख सशस्त्र हमलों से जुड़ा था — इनमें 2010 का दंतेवाड़ा नरसंहार (76 CRPF जवान शहीद) भी शामिल है।
मादवी हिड्मा कब और कहाँ मारा गया तथा मुठभेड़ में और कौन मारे गए?
हिड्मा 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली वन क्षेत्र में आंध्र प्रदेश सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। इस ऑपरेशन में उसकी पत्नी मादकम राजे (उर्फ राजक्का) और चार अन्य माओवादी भी मारे गए।
SAMADHAN रणनीति क्या है और यह मुठभेड़ उसे कैसे दर्शाती है?
SAMADHAN केंद्र सरकार की व्यापक वामपंथी उग्रवाद-विरोधी रणनीति है — इसमें स्मार्ट नेतृत्व, आक्रामक रणनीति, प्रेरणा और प्रशिक्षण, काम की खुफिया जानकारी, डैशबोर्ड-आधारित KPI, प्रौद्योगिकी का उपयोग, प्रत्येक मोर्चे के लिए कार्य योजना और वित्त पोषण पर रोक शामिल है। हिड्मा का खात्मा 2026 तक LWE समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है।
NIA ने हिड्मा को कौन सी कानूनी श्रेणी दी थी?
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मादवी हिड्मा को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 'विशेष नामित आतंकवादी' घोषित किया था, जो भारत के आतंकवाद-विरोधी ढाँचे में सबसे कड़ी कानूनी श्रेणियों में से एक है।
हिड्मा से जुड़े 2010 के दंतेवाड़ा नरसंहार का क्या महत्त्व है?
6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुई इस घात में 76 CRPF जवान शहीद हुए — माओवादी विद्रोह के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों पर एक ही हमले में यह सबसे घातक वारदात थी। माना जाता है कि इस हमले की योजना हिड्मा ने बनाई थी। यह घटना उसकी संचालन क्षमता और उसके खात्मे के सामरिक महत्त्व को रेखांकित करती है।
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