नीति आयोग ने कई मंत्रालयों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से 9-10 फरवरी 2026 को 'विकसित भारत और नेट ज़ीरो की दिशा में परिदृश्य' शीर्षक से 11 महत्वपूर्ण रिपोर्टों की श्रृंखला जारी की। सरकार की अगुवाई में किया गया यह भारत का पहला एकीकृत अध्ययन है, जिसमें 2070 तक जलवायु कार्रवाई और आर्थिक विकास के रास्तों का एक साथ आकलन किया गया है।

इन 11 क्षेत्रवार रिपोर्टों में बिजली, परिवहन, उद्योग, भवन, कृषि, वित्तपोषण और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई विषय शामिल हैं। हर रिपोर्ट में कार्बन उत्सर्जन घटाने के रास्ते बताए गए हैं और उन्हें विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा गया है। इस लक्ष्य के अनुसार, स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनना है।

प्रमुख अनुमानों के अनुसार, विकसित भारत परिदृश्य में 2047 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद 30 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच जाएगा। अगर मौजूदा रुझान जारी रहते हैं, तो उनके तहत होने वाले निवेश के अलावा 2070 तक नेट ज़ीरो हासिल करने के लिए 8.1 लाख करोड़ डॉलर का अतिरिक्त निवेश करना होगा। 2050-70 के दौरान सालाना अतिरिक्त ज़रूरत लगभग 29,000 करोड़ डॉलर होगी।

अध्ययन में नेट ज़ीरो और विकसित भारत के लक्ष्यों को साथ लेकर चलने के अतिरिक्त लाभ भी बताए गए हैं। इससे ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी, लाखों हरित रोज़गार पैदा होंगे और वायु प्रदूषण कम होने से जनस्वास्थ्य बेहतर होगा। वित्तपोषण संबंधी रिपोर्ट में निवेश की कमी दूर करने के लिए घरेलू पूंजी बाज़ार को मज़बूत बनाने, अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त जुटाने और मिश्रित वित्त के साधनों का उपयोग करने की ज़रूरत बताई गई है।

सौर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ज़रूरी महत्वपूर्ण खनिजों की भारत में माँग 2047 तक 13 गुना बढ़ जाएगी। कृषि संबंधी रिपोर्ट में उत्पादकता बढ़ाने के साथ मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन घटाने के रास्ते बताए गए हैं।

यह जलवायु और विकास के संबंध पर भारत सरकार का अब तक का सबसे व्यापक आधिकारिक अध्ययन है। इसीलिए यह अध्ययन RAS में पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और शासन से जुड़े प्रश्नों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।