प्रकाशित: 7 मार्च 2026समाचार स्रोतराजव्यवस्था
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से: वित्त विधेयक, विनियोग विधेयक और अनुदान माँगें एजेंडे पर
संसद का बजट सत्र 9 मार्च 2026 को अपने दूसरे चरण में पुनः प्रारंभ हुआ — 13 फरवरी को शुरू हुए 23 दिन के अंतर-सत्र अवकाश के बाद। यह चरण बजट प्रक्रिया का विधायी केंद्र होता है, जिसमें वित्त विधेयक, विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान माँगें और विनियोग विधेयक पारित किए जाते हैं — ये तीन व्यवस्थाएँ केंद्रीय बजट को वैधानिक बल देती हैं।
वित्त विधेयक बजट भाषण में घोषित कराधान प्रस्तावों को लागू करता है। यह आयकर अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम आदि में संशोधन करता है और राजस्व उपाय जारी रखने के लिए 31 मार्च से पहले लोकसभा में इसका पारित होना आवश्यक है।
अनुदान माँगें संसद द्वारा प्रत्येक मंत्रालय के व्यय को अधिकृत करने का तंत्र हैं। प्रत्येक माँग पर अलग मतदान होता है। समयाभाव में गिलोटिन प्रक्रिया — जिसमें अचर्चित माँगों पर एकसाथ मतदान होता है — अपनाई जाती है। इसके बाद विनियोग विधेयक भारत की समेकित निधि से स्वीकृत राशियों की निकासी को औपचारिक रूप से अधिकृत करता है।
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प्रश्न: बजट सत्र का दूसरा चरण वित्त विधेयक, अनुदान माँगों और विनियोग विधेयक के ज़रिए केंद्रीय बजट को कैसे लागू करता है?
उत्तर (50 शब्द):
दूसरा चरण तीन साधनों से बजट प्रस्तावों को कानून में बदलता है: कर विधियों में संशोधन करने वाला वित्त विधेयक, कटौती प्रस्तावों की व्यवस्था सहित मंत्रालय-वार व्यय की मंज़ूरी देने वाली अनुदान माँगें, और संचित निधि से निकासी स्वीकृत करने वाला विनियोग विधेयक। गिलोटिन प्रक्रिया 31 मार्च की समयसीमा से पहले बिना चर्चा वाली माँगों को जल्दी पारित कर देती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वित्त विधेयक क्या है और इसे 31 मार्च से पहले क्यों पारित करना होता है?
वित्त विधेयक केंद्रीय बजट के कराधान प्रस्तावों को वैधानिक प्रभाव देता है — यह आयकर अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम आदि में संशोधन करता है। इसे 31 मार्च से पहले लोकसभा में पारित होना आवश्यक है ताकि 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष में राजस्व संग्रह के उपाय कानूनी रूप से प्रभावी रहें।
अनुदान माँगें क्या हैं और गिलोटिन प्रक्रिया क्या है?
अनुदान माँगें संसद द्वारा प्रत्येक मंत्रालय के व्यय अधिकृत करने का तंत्र हैं। गिलोटिन तब लागू होती है जब समय समाप्त हो जाता है: सभी अचर्चित माँगों पर बिना बहस के एकसाथ मतदान होता है — इसे संसदीय जाँच को कमजोर करने वाला माना जाता है।
वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक में अंतर क्या है?
वित्त विधेयक राजस्व पक्ष से संबंधित है — सरकार को कर लगाने का अधिकार देता है। विनियोग विधेयक व्यय पक्ष से संबंधित है — अनुदान माँगों में मतदान की गई राशियों के लिए समेकित निधि से निकासी को औपचारिक रूप से अधिकृत करता है।
अनुदान माँगों के संदर्भ में कटौती प्रस्ताव क्या हैं?
कटौती प्रस्ताव तीन प्रकार के होते हैं: (1) नीति कटौती — माँग को ₹1 तक घटाकर नीति की अस्वीकृति; (2) मितव्ययिता कटौती — निर्दिष्ट राशि की कटौती; (3) सांकेतिक कटौती — ₹100 की कमी, प्रतीकात्मक विरोध। ये संसदीय वित्तीय जवाबदेही के साधन हैं।
बजट प्रक्रिया से संबंधित संविधान के कौन से अनुच्छेद हैं?
अनुच्छेद 112–116: अनु. 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण), अनु. 113 (संसद में प्रक्रिया), अनु. 114 (विनियोग विधेयक), अनु. 115 (अनुपूरक अनुदान), अनु. 116 (लेखानुदान और असाधारण अनुदान)। अनु. 110 धन विधेयक को परिभाषित करता है।