प्रकाशित: 21 जनवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
ऑपरेशन त्राशी-1: किश्तवाड़ के घने जंगलों में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी अभियान चौथे दिन भी जारी
ऑपरेशन त्राशी-1, एक बड़ा संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियान था, जो 22 जनवरी 2026 को जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू क्षेत्र के घने जंगलों में अपने चौथे दिन में प्रवेश कर रहा था। यह अभियान 14 जनवरी 2026 को कई सुरक्षा एजेंसियों से मिली साझा खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था। इसका निशाना पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का वह समूह था, जो अप्रैल 2024 में भारत में घुसपैठ कर चुका था और लगभग डेढ़ वर्ष से किश्तवाड़-उधमपुर पट्टी में सक्रिय था।
यह समूह स्वयं को इजराइल ग्रुप कहता था और इस अवधि में सुरक्षा बलों से इसकी 17 बार मुठभेड़ हो चुकी थी। अभियान में सेना की 11 राष्ट्रीय राइफल्स और 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज सहित विशेष इकाइयां शामिल थीं। पहाड़ी और घने जंगलों वाले भूभाग में वास्तविक समय की निगरानी, ड्रोन तकनीक और समन्वित सैन्य कार्रवाई के साथ खोजकर नष्ट करने वाला गहन अभियान चलाया जा रहा था। सेना का कुत्ता टायसन घने जंगल में आतंकवादियों का पीछा करने और उनका पता लगाने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा था।
अभियान अंततः 22 फरवरी 2026 को 326 दिनों के बाद समाप्त हुआ, जिसमें सैफुल्लाह नामक एक प्रमुख कमांडर सहित सभी चार शेष कट्टर आतंकवादियों को मार गिराया गया और भारतीय सुरक्षा बलों में कोई हताहत नहीं हुआ। ऑपरेशन त्राशी-I जम्मू-कश्मीर में भारत की बढ़ी हुई आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं और खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। चिनाब घाटी में स्थित किश्तवाड़ जिला हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगता है और लगातार घुसपैठ तथा विद्रोह का क्षेत्र रहा है।
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ऑपरेशन त्राशी-I कितने दिनों तक चला?
व्याख्या · सही उत्तर Cऑपरेशन त्राशी-I जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में भारतीय सेना, पुलिस और CRPF के सहयोग से चलाया गया लंबा आतंकवाद-रोधी अभियान था। रिपोर्टों के अनुसार यह अभियान समाप्त होने से पहले 326 दिनों तक चला और इसमें सात आतंकियों को मार गिराया गया। इसलिए विकल्प C सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑपरेशन त्राशी-I कब शुरू हुआ और इसका उद्देश्य क्या था?
ऑपरेशन त्राशी-I 14 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छत्रू क्षेत्र के घने जंगलों में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के उस समूह को बेअसर करना था, जिसने अप्रैल 2024 में घुसपैठ की थी और लगभग डेढ़ साल से किश्तवाड़-उधमपुर बेल्ट में सक्रिय था।
ऑपरेशन त्राशी-I में किन-किन सुरक्षा बलों ने भाग लिया?
यह एक संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान था, जिसमें 11 राष्ट्रीय राइफल्स (RR), 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज और कई सुरक्षा एजेंसियों ने भाग लिया। सेना के कुत्ते टाइसन ने घने जंगल में आतंकियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन त्राशी-I का परिणाम क्या रहा और यह कितने समय तक चला?
ऑपरेशन त्राशी-I 22 फरवरी 2026 को JeM समूह के चारों आतंकियों के खात्मे के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारतीय पक्ष में कोई हताहत नहीं हुआ। अप्रैल 2024 में घुसपैठ से लेकर यह अभियान 326 दिनों तक चला, जो भारत के सबसे लंबे आतंकवाद-रोधी अभियानों में से एक है।
जैश-ए-मोहम्मद (JeM) क्या है और इस पर भारत का क्या रुख है?
जैश-ए-मोहम्मद (JeM) पाकिस्तान स्थित एक आतंकवादी संगठन है, जिसे UN सुरक्षा परिषद ने वैश्विक आतंकी संस्था घोषित किया है और भारत में प्रतिबंधित किया गया है। यह 2019 के पुलवामा हमले सहित कई बड़े हमलों के लिए जिम्मेदार है। भारत लगातार पाकिस्तान में JeM के ढाँचे को ध्वस्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाता रहा है।
ऑपरेशन त्राशी-I भारत की आतंकवाद-रोधी क्षमताओं के बारे में क्या दर्शाता है?
326 दिनों तक चली खोज में किसी भारतीय के हताहत हुए बिना चारों घुसपैठियों को निष्क्रिय करना भारत की उन्नत खुफिया जानकारी पर आधारित आतंकवाद-रोधी क्षमता, कई सुरक्षा बलों के बीच प्रभावी समन्वय और अधिक ऊँचाई वाले वनाच्छादित कठिन भूभाग में परिचालन लचीलापन दिखाता है।