ऑपरेशन त्राशी-1, एक बड़ा संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियान था, जो 22 जनवरी 2026 को जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू क्षेत्र के घने जंगलों में अपने चौथे दिन में प्रवेश कर रहा था। यह अभियान 14 जनवरी 2026 को कई सुरक्षा एजेंसियों से मिली साझा खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था। इसका निशाना पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का वह समूह था, जो अप्रैल 2024 में भारत में घुसपैठ कर चुका था और लगभग डेढ़ वर्ष से किश्तवाड़-उधमपुर पट्टी में सक्रिय था।

यह समूह स्वयं को इजराइल ग्रुप कहता था और इस अवधि में सुरक्षा बलों से इसकी 17 बार मुठभेड़ हो चुकी थी। अभियान में सेना की 11 राष्ट्रीय राइफल्स और 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज सहित विशेष इकाइयां शामिल थीं। पहाड़ी और घने जंगलों वाले भूभाग में वास्तविक समय की निगरानी, ड्रोन तकनीक और समन्वित सैन्य कार्रवाई के साथ खोजकर नष्ट करने वाला गहन अभियान चलाया जा रहा था। सेना का कुत्ता टायसन घने जंगल में आतंकवादियों का पीछा करने और उनका पता लगाने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा था।

अभियान अंततः 22 फरवरी 2026 को 326 दिनों के बाद समाप्त हुआ, जिसमें सैफुल्लाह नामक एक प्रमुख कमांडर सहित सभी चार शेष कट्टर आतंकवादियों को मार गिराया गया और भारतीय सुरक्षा बलों में कोई हताहत नहीं हुआ। ऑपरेशन त्राशी-I जम्मू-कश्मीर में भारत की बढ़ी हुई आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं और खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। चिनाब घाटी में स्थित किश्तवाड़ जिला हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगता है और लगातार घुसपैठ तथा विद्रोह का क्षेत्र रहा है।