भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग केवल परिवहन का साधन नहीं हैं, बल्कि संपर्क, माल परिवहन, शहरी आवाजाही और नदी पर्यटन से जुड़े आर्थिक विकास का बड़ा आधार हैं। इसी संदर्भ में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान करीब ₹3,000 करोड़ के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर में माल परिवहन, जल-आधारित शहरी आवाजाही और नदी पर्यटन को बढ़ाना है और सड़क व रेल परिवहन के मुकाबले अपेक्षाकृत पर्यावरण-अनुकूल विकल्प विकसित करना है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और क्षेत्रीय विकास को जोड़ता है। प्राधिकरण ने असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के साथ मेथनॉल और फॉर्मेलिन को भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और राष्ट्रीय जलमार्गों से ले जाने के लिए समझौता किया। इससे बोगीबील, पांडु और जोगीघोपा स्थित टर्मिनलों से बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया तक निर्यात तथा राष्ट्रीय जलमार्ग-1 और राष्ट्रीय जलमार्ग-2 से घरेलू माल परिवहन को बल मिलने की उम्मीद है। इस पहल में टैंकर जहाजों और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब ₹400 करोड़ का निवेश बताया गया है।
दूसरा प्रमुख समझौता असम सरकार के साथ तेजपुर, गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र के किनारे जल मेट्रो विकसित करने से जुड़ा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत, भूमि लागत को छोड़कर, करीब ₹1,000 करोड़ है और इसका लक्ष्य जल-आधारित आवाजाही को सड़क, रेल और बस प्रणालियों से जोड़ना है। नदी पर्यटन के लिए ₹500 करोड़ का समझौता, आधुनिक टग-बार्ज के लिए ₹1,000 करोड़ का समझौता और नेमाटी, सिलघाट, बिस्वनाथ घाट तथा गुइजान में क्रूज टर्मिनलों के लिए ₹299 करोड़ का प्रावधान भी पूर्वोत्तर की नदी-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। स्टैटिक जीके में यह विषय ब्रह्मपुत्र, राष्ट्रीय जलमार्ग, भारत-बांग्लादेश संपर्क और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी से जुड़ता है।
