29 सितम्बर को प्रतिवर्ष विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। 2025 का विषय 'डोन्ट मिस ए बीट' है, जो नियमित हृदय जाँच, शीघ्र पहचान एवं जीवनशैली परिवर्तन पर बल देता है। भारत में हृदय-रोग (CVD) से होने वाली मौतें कुल मौतों का लगभग 1/4 हिस्सा हैं। WHO के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में प्रतिमिनट 8 लोगों की मृत्यु CVD से होती है। भारत में 22 करोड़ वयस्कों को उच्च रक्तचाप है, किन्तु केवल 12% में यह नियंत्रित है। 80% तक हृदय रोग एवं स्ट्रोक को जीवनशैली परिवर्तन से रोका जा सकता है।
29 सितम्बर को विश्व हृदय दिवस 2025 — विषय 'डोन्ट मिस ए बीट'
29 सितम्बर को प्रतिवर्ष विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। 2025 का विषय 'डोन्ट मिस ए बीट' है, जो नियमित हृदय जाँच, शीघ्र पहचान एवं जीवनशैली में बदलाव पर बल देता है। भारत में हृदय-रोग (CVD) से होने वाली मौतें कुल मौतों का लगभग 1/4 हिस्सा हैं। WHO के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में प्रतिमिनट 8 लोगों की मृत्यु CVD से होती है। भारत में 22 करोड़ वयस्कों को उच्च रक्तचाप है, किन्तु केवल 12% में यह नियंत्रित है। 80% तक हृदय रोग एवं स्ट्रोक को जीवनशैली में बदलाव से रोका जा सकता है।
मुख्य तथ्य
- 29 सितंबर को 'डोन्ट मिस ए बीट' विषय के साथ विश्व हृदय दिवस 2025 मनाया गया।
- विषय नियमित हृदय जाँच, शीघ्र पहचान और जीवनशैली परिवर्तन पर बल देता है।
- भारत में हृदय रोगों से कुल मौतों का लगभग 1/4 हिस्सा होता है।
- WHO के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में CVD से प्रतिमिनट 8 मौतें होती हैं।
- पिछले दो दशकों में भारत में CVD का बोझ दोगुना हो गया है।
- विश्व हृदय दिवस की स्थापना 2000 में विश्व हृदय संघ ने की थी।
6-अक्ष वर्गीकरण
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WHO India के अनुसार, भारत में लगभग कितने लोग उच्च रक्तचाप के साथ जी रहे हैं और उनमें से कितने प्रतिशत का रक्तचाप नियंत्रण में है?
WHO India के अनुसार, भारत में लगभग 22 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप के साथ जी रहे हैं और केवल 12% लोगों का रक्तचाप नियंत्रण में है। इसलिए विकल्प B सही है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व हृदय दिवस कब मनाया जाता है, इसकी स्थापना किसने की और 2025 का विषय क्या था?
विश्व हृदय दिवस प्रतिवर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है। इसकी स्थापना 2000 में जिनेवा स्थित NGO विश्व हृदय संघ (WHF) ने WHO और UNESCO के साथ मिलकर की थी। 2025 का विषय 'डोन्ट मिस ए बीट' था, जो नियमित हृदय जाँच, हृदय रोग की शीघ्र पहचान और हृदय-स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देता है।
भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में हृदय-रोगों का बोझ कितना है?
भारत में हृदय-रोग (CVD) कुल मौतों के लगभग 1/4 हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं और मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। पिछले दो दशकों में भारत में CVD का बोझ दोगुना हो गया है। WHO के अनुसार दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में CVD से प्रतिमिनट 8 मौतें होती हैं। भारत में कम से कम 22 करोड़ वयस्कों को उच्च रक्तचाप है, लेकिन केवल 12% में यह नियंत्रित है — यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।
हृदय रोग और स्ट्रोक के कितने प्रतिशत मामले रोके जा सकते हैं और नीति के लिए इसका क्या अर्थ है?
WHO और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 80% तक हृदय रोग और स्ट्रोक के मामले जीवनशैली में बदलाव से रोके जा सकते हैं — संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तंबाकू-शराब से परहेज और तनाव प्रबंधन। इसका अर्थ है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में प्राथमिक रोकथाम, शीघ्र जाँच और विश्व हृदय दिवस जैसे जागरूकता अभियानों पर जोर दिया जाना चाहिए।
'डोन्ट मिस ए बीट' विषय RPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विषय RPSC अभ्यर्थियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्थान में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाकू उपयोग और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण CVDs बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन रहे हैं। GS पेपर III (सामान्य विज्ञान एवं स्वास्थ्य) के लिए अभ्यर्थियों को WHO की भूमिका, भारत का रोग बोझ, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम और गैर-संचारी रोगों के सामाजिक निर्धारकों की समझ होनी चाहिए।
भारत में हृदय रोग रोकथाम के लिए कौन से राष्ट्रीय कार्यक्रम हैं?
भारत में CVD रोकथाम के लिए कई कार्यक्रम हैं: (1) NPCDCS — कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम का मुख्य कार्यक्रम। (2) PM-Jan Arogya Yojana (आयुष्मान भारत) — कम आय वाले परिवारों के हृदय उपचार के लिए स्वास्थ्य कवरेज। (3) प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना — AIIMS जैसे संस्थानों से विशेष हृदय देखभाल। (4) फिट इंडिया मूवमेंट — शारीरिक गतिविधि बढ़ाकर CVD जोखिम कारक कम करना।
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