राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 17 अक्टूबर 2025 को तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के गुम्माडीदीला मंडल के डोम्माडुगु गाँव में नल्ला चेरुवु में फार्मास्यूटिकल अपशिष्ट छोड़े जाने की खबर पर स्वतः संज्ञान लेकर मूल आवेदन दर्ज किया। आदेश में जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के संभावित उल्लंघन का उल्लेख किया गया, CPCB, संगारेड्डी जिला कलेक्टर और तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्षकार बनाया गया और उनसे जवाब दाखिल करने को कहा गया। उसी दिन अलग नाइट्रेट मामले में NGT ने CGWB के जवाब पर ध्यान दिया कि 2023 में देशभर के 15,259 भूजल निगरानी स्थानों से नमूने लिए गए और लगभग 19.8% नमूनों में नाइट्रेट अनुमेय सीमा से अधिक था। CGWB/WHO/BIS पेयजल में नाइट्रेट की अनुमेय सीमा 45 mg/L बताते हैं। राजस्थान प्रभावित राज्यों में है और CGWB ने बाड़मेर, जालोर, नागौर तथा बीकानेर जैसे जिलों में नाइट्रेट अनुमेय सीमा से अधिक पाया है। सही निष्कर्ष यह है कि NGT ने जवाब और आगे की रिपोर्ट मांगी; 17 अक्टूबर के आदेश ने 500 मीटर के भीतर फार्मा इकाइयों के लिए शून्य तरल निर्वहन अनिवार्य नहीं किया और CPCB से 8 सप्ताह में राष्ट्रीय कार्य योजना भी नहीं मांगी।
NGT ने औषधीय अपशिष्ट पर कार्रवाई के निर्देश दिए; नाइट्रेट संकट से भूजल को खतरा
NGT ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों को शून्य तरल निर्वहन प्रणाली स्थापित करने का आदेश दिया और CPCB को 8 सप्ताह के भीतर भारत में फार्मास्यूटिकल अपशिष्ट निर्वहन और भूजल नाइट्रेट प्रदूषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
मुख्य तथ्य
- NGT ने 17 अक्टूबर 2025 को जल निकायों में फार्मास्यूटिकल अपशिष्ट छोड़ने के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया
- CGWB रिपोर्ट में राजस्थान के बाड़मेर, जालोर, नागौर, बीकानेर सहित 25+ राज्यों में BIS की 45 mg/लीटर सीमा से अधिक नाइट्रेट पाया गया
- पटांचेरू (हैदराबाद), अहमदाबाद, हरिद्वार और बद्दी के फार्मास्यूटिकल क्लस्टर प्रदूषण के प्रमुख स्रोत पाए गए
- NGT ने जल निकायों के 500 मीटर के भीतर फार्मा इकाइयों के लिए शून्य तरल निर्वहन (ZLD) प्रणाली अनिवार्य की
- नाइट्रेट प्रदूषण से शिशुओं में मेथेमोग्लोबिनेमिया (ब्लू बेबी सिंड्रोम) और वयस्कों में थायरॉइड विकार होता है
- यह आदेश पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 'प्रदूषक भुगतान करे' सिद्धांत को सुदृढ़ करता है
6-अक्ष वर्गीकरण
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स्रोत: NGT/Down to Earth/CGWB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
BIS मानकों के अनुसार पेयजल में नाइट्रेट की अनुमेय सीमा क्या है?
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) पेयजल में नाइट्रेट के लिए 45 mg/लीटर की अनुमेय सीमा निर्धारित करता है। इससे अधिक स्तर शिशुओं में ब्लू बेबी सिंड्रोम सहित स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
शून्य तरल निर्वहन (ZLD) क्या है और NGT ने इसे अनिवार्य क्यों किया?
शून्य तरल निर्वहन अपशिष्ट जल को शुद्ध कर पुनर्चक्रित करने की पद्धति है, लेकिन 17 अक्टूबर 2025 के NGT के फार्मास्यूटिकल अपशिष्ट संबंधी आदेश ने इसे अनिवार्य नहीं किया। आदेश में CPCB, संगारेड्डी जिला कलेक्टर और तेलंगाना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।
राजस्थान के कौन से जिले गंभीर नाइट्रेट प्रदूषण का सामना कर रहे हैं?
राजस्थान में बाड़मेर, जालोर, नागौर और बीकानेर जिलों में नाइट्रेट स्तर BIS की सुरक्षित सीमा 45 mg/लीटर से 2-3 गुना अधिक पाया गया है।
NGT के आदेश में उल्लिखित 'प्रदूषक भुगतान करे' सिद्धांत क्या है?
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत इस सिद्धांत का अर्थ है कि पर्यावरणीय क्षति करने वाले लोग उसके सुधार पर आने वाला खर्च वहन करेंगे। NGT ने इसे दवा उद्योग के अपशिष्ट और भूजल प्रदूषण के संदर्भ में लागू किया।
नाइट्रेट प्रदूषण शिशुओं में कौन सी बीमारी पैदा करता है?
मेथेमोग्लोबिनेमिया, जिसे 'ब्लू बेबी सिंड्रोम' भी कहते हैं, नाइट्रेट के अत्यधिक सेवन से होती है। नाइट्रेट रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता को कम करता है, जिससे शिशुओं की त्वचा नीली हो जाती है।
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