एक ऐतिहासिक पर्वतारोहण उपलब्धि में भारतीय सेना की पूर्वी कमान की 18 सदस्यीय टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार पहली बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की। टीम को 3 नवंबर 2025 को गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने अग्रिम बेस से झंडी दिखाई थी, और 26 नवंबर 2025 को अत्यंत चुनौतीपूर्ण दक्षिणी मार्ग से टीम ने शिखर पर पहुँचकर पहले कभी नहीं चढ़ी गई चोटी पर तिरंगा फहराया। अभियान का औपचारिक समापन 30 नवंबर 2025 को दिरांग, पश्चिम कामेंग जिले में पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी ने किया, और 8 दिसंबर 2025 को राज्यपाल सचिवालय ने इस उपलब्धि का उल्लेख किया। कामेंग हिमालय में स्थित माउंट कांगटो पर इससे पहले कभी सफल चढ़ाई नहीं हुई थी। पर्वतारोहियों ने विरल वायु, भीषण शून्य से कम तापमान, खतरनाक बर्फीले कटक, गहरी दरारें और लगभग ऊर्ध्वाधर बर्फ की दीवारें जैसी अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अरुणाचल प्रदेश भारत-चीन सीमा विवाद के केंद्र में है — चीन इसे 'दक्षिण तिब्बत' (ज़ांगनान) कहता है। यह उपलब्धि क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और परिचालन पहुँच का प्रतीक है।
भारतीय सेना ने इतिहास रचा: पूर्वी कमान की 18 सदस्यीय टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर पहली बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की
एक ऐतिहासिक पर्वतारोहण उपलब्धि में भारतीय सेना की पूर्वी कमान की 18 सदस्यीय टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर ज्ञात इतिहास में पहली बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की। टीम को 3 नवंबर 2025 को गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने अग्रिम बेस से झंडी दिखाई थी, और 26 नवंबर 2025 को अत्यंत चुनौतीपूर्ण दक्षिणी मार्ग से टीम ने शिखर पर पहुँचकर पहले कभी नहीं चढ़ी गई चोटी पर तिरंगा फहराया। अभियान का 30 नवंबर 2025 को दिरांग, पश्चिम कामेंग जिले में पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी ने औपचारिक रूप से फ्लैग-इन किया, और 8 दिसंबर 2025 को राज्यपाल सचिवालय ने इस उपलब्धि का उल्लेख किया। कामेंग हिमालय में स्थित माउंट कांगटो पर इससे पहले कभी चढ़ाई नहीं हुई थी। पर्वतारोहियों ने विरल वायु, भीषण शून्य से कम तापमान, खतरनाक बर्फीले कटक, गहरी दरारें और लगभग ऊर्ध्वाधर बर्फ की दीवारें जैसी अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अरुणाचल प्रदेश भारत-चीन सीमा विवाद के केंद्र में है; चीन इसे 'दक्षिण तिब्बत' (ज़ांगनान) कहता है। यह उपलब्धि क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और परिचालन पहुँच का प्रतीक है।
मुख्य तथ्य
- भारतीय सेना की 18 सदस्यीय टीम ने 26 नवंबर 2025 को माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर पहली चढ़ाई की।
- अरुणाचल प्रदेश की इस चोटी पर पहले कभी सफल चढ़ाई नहीं हुई थी।
- टीम ने अत्यंत कठिन दक्षिणी मार्ग से चढ़ाई कर तिरंगा फहराया।
- यह उपलब्धि अरुणाचल में भारत-चीन सीमा विवाद को देखते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
- चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' कहता है; इससे इस शिखर का भू-राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
- पर्वतारोहियों ने विरल वायु, शून्य से नीचे तापमान और लगभग ऊर्ध्वाधर बर्फ की दीवारों का सामना किया।
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भारतीय सेना की पूर्वी कमान टीम ने दिसंबर 2025 में पहली बार किस पर्वत पर चढ़ाई की?
दिसंबर 2025 में भारतीय सेना की पूर्वी कमान की 18 सदस्यीय टीम ने अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी माउंट कांगतो की पहली दर्ज सफल चढ़ाई की। कंचनजंगा इस घटना का सही उत्तर नहीं है, क्योंकि वह पहले से चढ़ी जा चुकी चोटी है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माउंट कांगटो पर पहली सफल चढ़ाई कब और किसने की?
अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी माउंट कांगटो (7,042 मीटर) पर पहली सफल चढ़ाई 26 नवंबर 2025 को भारतीय सेना की पूर्वी कमान की 18 सदस्यीय टीम ने कठिन दक्षिणी मार्ग से की।
माउंट कांगटो की चढ़ाई का रणनीतिक और भू-राजनीतिक महत्व क्या है?
माउंट कांगटो अरुणाचल प्रदेश में स्थित है जिसे चीन 'दक्षिण तिब्बत' कहता है। भारतीय सेना की पहली सफल चढ़ाई भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय दावे का मजबूत संदेश देती है, जो भारत-चीन सीमा विवाद के संदर्भ में बड़ा भू-राजनीतिक महत्व रखती है।
माउंट कांगटो अभियान को किस सेना कोर ने झंडी दिखाई और कब?
गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने 3 नवंबर 2025 को अग्रिम बेस से 18 सदस्यीय टीम को रवाना किया। टीम 23 दिन बाद 26 नवंबर 2025 को शिखर पर पहुँची।
माउंट कांगटो अभियान के दौरान भारतीय सेना की टीम को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
टीम को बहुत अधिक ऊँचाई वाली कठिन परिस्थितियों से जूझना पड़ा — कम ऑक्सीजन वाली विरल हवा, शून्य से नीचे तापमान और लगभग सीधी बर्फीली दीवारें; इन्हीं कारणों से दक्षिणी मार्ग पूर्वी हिमालय के सबसे तकनीकी रूप से कठिन मार्गों में से एक माना जाता है।
माउंट कांगटो की पहली सफल चढ़ाई भारत के पर्वतारोहण इतिहास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
माउंट कांगटो पर 26 नवंबर 2025 से पहले दर्ज इतिहास में कोई सफल चढ़ाई नहीं हुई थी। भारतीय सेना की पहली सफल चढ़ाई ने इसे भारत की ऐतिहासिक पर्वतारोहण उपलब्धियों में जगह दिलाई — यह तकनीकी उत्कृष्टता, राष्ट्रीय गौरव और संवेदनशील सीमा क्षेत्र में रणनीतिक महत्व का संगम है।
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