भारत ने नवंबर 2025 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 का लक्ष्य हासिल कर लिया। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 20% मिश्रण का मूल लक्ष्य 2030 के लिए रखा गया था, लेकिन भारत ने इसे पांच साल पहले पूरा कर लिया। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और सरकारी नीति के मिलेजुले हिस्से में आता है।
इथेनॉल मिश्रण का सीधा संबंध कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने से है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर काफी निर्भर रहता है, इसलिए पेट्रोल में इथेनॉल का अधिक मिश्रण विदेशी मुद्रा बचत और ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में पूछा जा सकता है। परिवहन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करने का पहलू इसे पर्यावरण और जलवायु नीति से भी जोड़ता है।
स्टैटिक जीके में इस विषय को राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम और स्वच्छ ईंधन नीति से जोड़ा जा सकता है। आधिकारिक नीति संदर्भ में 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में 2022 के संशोधन के बाद 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से पहले लाकर 2025-26 की इथेनॉल आपूर्ति वर्ष अवधि से जोड़ा गया था। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने जून 2022 में 10% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य भी समय से पहले हासिल किया था, जिससे कार्यक्रम की प्रगति साफ़ नज़र आती है।
प्रारंभिक परीक्षा में ई20, 20%, नवंबर 2025, 2030 लक्ष्य और कच्चे तेल आयात जैसे तथ्य सीधे पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे ऊर्जा आयात निर्भरता, स्वच्छ ईंधन, परिवहन क्षेत्र के उत्सर्जन और नीति-क्रियान्वयन की क्षमता के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है।
