भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने एक ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें दशक भर के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि भारतीय राज्यों का संयुक्त सार्वजनिक ऋण 2012-13 में 17.57 लाख करोड़ रुपये से लगभग तिगुना होकर 2022-23 में 59.60 लाख करोड़ रुपये हो गया — एक दशक में 239% की वृद्धि। 28 राज्यों पर आधारित यह रिपोर्ट ऋण स्थिरता के चिंताजनक रुझानों को रेखांकित करती है। पंजाब सबसे अधिक राजकोषीय तनाव में रहा, जहां सार्वजनिक ऋण GSDP के 40.35% तक पहुंच गया — FRBM के तहत सुझाई गई 25% सीमा से बहुत अधिक। रिपोर्ट में 11 राज्यों की पहचान की गई जो बुनियादी ढांचे में पूंजी निवेश के बजाय वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे राजस्व व्यय के लिए उधार ले रहे हैं। CAG ने यह भी पाया कि राज्यों ने वास्तविक राजकोषीय तनाव को छिपाने के लिए राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों और SPV के जरिए बजट से बाहर की उधारी पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई है। रिपोर्ट FRBM मानदंडों के सख्त प्रवर्तन और केंद्रीय हस्तांतरण को राजकोषीय समेकन के तय लक्ष्यों से जोड़ने की सिफारिश करती है।
CAG की दशकीय रिपोर्ट: 10 वर्षों में राज्यों का सार्वजनिक ऋण तिगुना, पंजाब की स्थिति सबसे खराब, ऋण 40.35% GSDP
CAG की दशकीय रिपोर्ट से पता चलता है कि राज्यों का सार्वजनिक ऋण 2013 में 17.57 लाख करोड़ रुपये से लगभग तिगुना होकर 2023 में 59.60 लाख करोड़ रुपये हो गया। पंजाब की स्थिति सबसे खराब है, जहाँ सार्वजनिक ऋण GSDP का 40.35% है, और 11 राज्य बुनियादी ढांचे के बजाय वेतन के लिए उधार ले रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- राज्यों का संयुक्त सार्वजनिक ऋण 2013 में 17.57 लाख करोड़ रुपये से 2023 में 59.60 लाख करोड़ रुपये हो गया — 10 वर्षों में 239% की वृद्धि
- पंजाब का ऋण-GSDP अनुपात 40.35% है, जो सबसे खराब स्थिति दर्शाता है और FRBM की 25% सीमा से बहुत अधिक है
- 11 राज्य पूंजी निवेश के बजाय राजस्व व्यय (वेतन, पेंशन, सब्सिडी) के लिए उधार ले रहे हैं
- राज्य वास्तविक राजकोषीय तनाव छुपाने के लिए राज्य उद्यमों और SPV के जरिए ऑफ-बजट उधारी ले रहे हैं
- CAG ने FRBM का सख्त प्रवर्तन, आकस्मिक देनदारियों की पारदर्शी रिपोर्टिंग और केंद्रीय हस्तांतरण को राजकोषीय लक्ष्यों से जोड़ने की सिफारिश की
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स्रोत: CAG
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CAG की दशकीय रिपोर्ट के अनुसार 2012-13 और 2022-23 के बीच राज्यों का संयुक्त सार्वजनिक ऋण कितना बढ़ा?
राज्यों का संयुक्त सार्वजनिक ऋण 2012-13 में 17.57 लाख करोड़ रुपये से लगभग तिगुना होकर 2022-23 में 59.60 लाख करोड़ रुपये हो गया — यानी 10 वर्षों में 239% की वृद्धि।
CAG रिपोर्ट के अनुसार GSDP के अनुपात में किस राज्य पर सबसे अधिक ऋण है?
GSDP के अनुपात में पंजाब पर सबसे अधिक ऋण है, जो 40.35% है। यह FRBM-अनुशंसित 25% सीमा से बहुत अधिक है।
CAG रिपोर्ट 11 राज्यों के उधारी व्यवहार को लेकर क्या चिंता जताती है?
ये 11 राज्य पूंजीगत बुनियादी ढांचे में निवेश करने के बजाय वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे राजस्व व्यय के लिए उधार ले रहे हैं, जिससे संरचनात्मक ऋण जाल बन रहे हैं।
ऑफ-बजट उधारी क्या है और CAG इसे क्यों चिह्नित करती है?
ऑफ-बजट उधारियां राज्य उद्यमों और SPV से लिए गए ऐसे ऋण हैं जो आधिकारिक बजट में नहीं दिखते और वास्तविक राजकोषीय दबाव को छिपा देते हैं।
राज्यों की राजकोषीय स्थिति सुधारने के लिए CAG क्या सिफारिशें करती है?
FRBM मानदंडों को सख्ती से लागू करना, आकस्मिक देनदारियों की पारदर्शी रिपोर्टिंग करना और केंद्रीय हस्तांतरण को राजकोषीय समेकन के तय लक्ष्यों से जोड़ना।
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