प्रकाशित: 21 अक्टूबर 2025अर्थव्यवस्था
भारत का 2025-26 सोयाबीन उत्पादन 142.66 लाख टन अनुमानित
भारत का सोयाबीन उत्पादन 2025 में पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर 105.4 लाख टन पर आ गया, जो 2024 के 125.8 लाख टन से 16.3% कम है। अनियमित मानसून और कीटों के प्रकोप से प्रमुख उत्पादक राज्य प्रभावित हुए।
सबसे बड़े उत्पादक मध्य प्रदेश (राष्ट्रीय उत्पादन का 45%) में उपज में 20% गिरावट आई। महाराष्ट्र और राजस्थान में भी भारी नुकसान हुआ। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी) में सोयाबीन क्षेत्र 12% कम हुआ क्योंकि कुछ किसान दलहन की ओर मुड़े। कमी से खाद्य तेल आयात बढ़ने और चालू खाता घाटा बढ़ने की संभावना है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में भारत के सोयाबीन उत्पादन का क्या हुआ?
भारत का सोयाबीन उत्पादन 2025 में **पांच वर्षों के निम्नतम स्तर 105.4 लाख टन** तक गिर गया, जो अनियमित मानसून वर्षा, कीट हमलों और प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हुआ।
भारत के सोयाबीन उत्पादन का पांच वर्षों का निम्नतम आंकड़ा क्या है?
भारत का सोयाबीन उत्पादन 2025 में **पांच वर्षों के निम्नतम स्तर 105.4 लाख टन** तक पहुंचा, जो पिछले वर्षों के उत्पादन स्तर से काफी कम है।
भारत में सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्य कौन से हैं?
भारत में सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्य **मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान** हैं, जिनका मिलकर भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन में 90% से अधिक हिस्सा है।
भारत का सोयाबीन उत्पादन पांच वर्षों के निम्नतम स्तर पर क्यों गिरा?
भारत का सोयाबीन उत्पादन **मानसून के असमान वितरण, कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा, अन्य क्षेत्रों में सूखे की स्थिति और कीटों व रोगों के प्रकोप** के कारण पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर तक गिर गया।
सोयाबीन उत्पादन में गिरावट का भारत के तिलहन क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?
**105.4 लाख टन** तक की गिरावट से घरेलू सोयाबीन मील और सोयाबीन तेल की आपूर्ति सीमित हो जाएगी, जिससे **खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है** और पोल्ट्री फीड की लागत प्रभावित हो सकती है।