राजस्थान वन विभाग ने अलवर के कटी घाटी जैविक उद्यान को आगामी जैविक उद्यानों की सूची में शामिल किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के पास स्थित यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पशु बचाव और पारिस्थितिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रस्तावित उद्यान कटी घाटी और जयसमंद के बीच लगभग 100 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होगा। कुल क्षेत्रफल का केवल एक-तिहाई भाग पशु बाड़ों और आगंतुक सुविधाओं के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि अधिकांश भूमि प्राकृतिक आवासों को बचाए रखने के लिए हरित आवरण में रहेगी। शेर, चीता और भारत की मूल बाघ उप-प्रजातियों जैसी प्रमुख प्रजातियों सहित 81 प्रजातियों के 400 से अधिक जानवरों को रखने की योजना है। इस उद्यान में एक ही परिसर के भीतर कई सफारी क्षेत्र होंगे, जिनमें शेर सफारी, बाघ सफारी और शाकाहारी सफारी शामिल हैं। इससे यह NCR क्षेत्र का पहला एकीकृत सफारी परिसर बनेगा और आगंतुक अलग-अलग स्थानों पर गए बिना विविध वन्यजीवों को देख सकेंगे। प्रमुख सुविधाओं में एक विशेष पशु बचाव केंद्र और प्रशिक्षित वन्यजीव पशु चिकित्सकों द्वारा संचालित उन्नत चिकित्सा उपचार सुविधाओं वाला आधुनिक पशु चिकित्सालय शामिल होगा। इस उद्यान की परिकल्पना दो उद्देश्यों से की गई है: संरक्षण और शिक्षा केंद्र के रूप में काम करना तथा अलवर क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देना, जिसे पहले से ही सरिस्का टाइगर रिजर्व की निकटता का लाभ मिलता है। यह परियोजना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक पर्यटन विकास के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है।