25–26 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत दुर्लभ मृदा और लिथियम की खोज से जुड़े कार्यक्रमों को तेज कर रहा है — राजस्थान के नागौर जिले में डेगाना और जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में शुरुआती सर्वेक्षण का काम तेजी से चल रहा है। भारत का लक्ष्य 2030 तक दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 5,000 टन तक बढ़ाना है।

डेगाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि रियासी, जम्मू-कश्मीर के सलाल-हैमाना भंडार के बाद यह भारत में लिथियम की दूसरी बड़ी खोज है। राजस्थान के चट्टानी लिथियम भंडार ब्राइन-आधारित भंडारों की तुलना में अधिक जटिल हैं, लेकिन इनमें बड़ी औद्योगिक क्षमता है। परमाणु खनिज निदेशालय (AMD) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) इस खोज कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं।

लिथियम EV बैटरी, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। भारत वर्तमान में अपनी 90% से अधिक लिथियम आवश्यकताओं का आयात करता है। डेगाना और रियासी में घरेलू खोज भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (2024-25 के बजट में घोषणा के बाद 29 जनवरी 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित) के केंद्र में है।