राजस्थान में 17 सितंबर 2025 को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राजेश्वर सिंह को नया मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। वे मधुकर गुप्ता के उत्तराधिकारी हैं और 35 वर्ष की सेवा के अनुभव वाले सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। यह नियुक्ति स्थानीय स्वशासन से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को भी याद कराती है, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों की चुनावी व्यवस्था का संवैधानिक आधार है।

राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य काम पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के लिए निर्वाचक नामावली की तैयारी तथा चुनावों के संचालन पर अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण रखना है। पंचायत चुनावों के लिए अनुच्छेद 243-K और नगरपालिका चुनावों के लिए अनुच्छेद 243-ZA परीक्षा की दृष्टि से सीधे पूछे जाने वाले प्रावधान हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, और आयोग भारत निर्वाचन आयोग से अलग राज्य-स्तरीय संवैधानिक निकाय के रूप में काम करता है। इसी से आयोग की स्वतंत्रता और स्थानीय चुनावों की निष्पक्षता का संवैधानिक आधार समझ में आता है।

राजस्थान के संदर्भ में यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और नगरीय निकायों तक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करते हैं। RAS और अन्य राजस्थान परीक्षाओं में इस खबर से किसकी नियुक्ति हुई, नियुक्ति किसने की, संवैधानिक अनुच्छेद, स्थानीय स्वशासन और राज्यपाल की भूमिका जैसे बिंदु बन सकते हैं। UPSC के लिए भी यह उदाहरण 73वें और 74वें संविधान संशोधनों, विकेंद्रीकरण और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता को समझने में उपयोगी है। मुख्य परीक्षा में इसे स्थानीय लोकतंत्र, संस्थागत निरंतरता और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है।