राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने 16 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी राजेश्वर सिंह को राजस्थान का नया मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। वे मधुकर गुप्ता के स्थान पर नियुक्त हुए और उनके पास 35 वर्ष से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। इस नियुक्ति से राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका और राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों की स्वतंत्र व्यवस्था फिर से चर्चा में आई।

राज्य निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 243-K के तहत एक संवैधानिक निकाय है। राजस्थान में पंचायत चुनावों के लिए अनुच्छेद 243-K और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243-ZA के तहत इसका काम चुनावों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण से जुड़ा है। इसलिए यह नियुक्ति केवल पद-परिवर्तन नहीं है; इससे स्थानीय स्वशासन, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनावी प्रशासन जैसे पहलू भी जुड़ते हैं। भारत निर्वाचन आयोग संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराता है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग राज्य के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों पर केंद्रित रहता है।

परीक्षा की दृष्टि से राजेश्वर सिंह, हरिभाऊ बागड़े, मधुकर गुप्ता, 16 सितंबर 2025, अनुच्छेद 243-K और अनुच्छेद 243-ZA जैसे तथ्य सीधे प्रारंभिक परीक्षा में पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इस घटना को स्थानीय लोकतंत्र, पंचायती राज संस्थाओं, नगरपालिकाओं और संवैधानिक निकायों की निष्पक्षता से जोड़ा जा सकता है। राजस्थान की पंचायती राज व्यवस्था में 70,000 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों का तथ्य यह दिखाता है कि राज्य निर्वाचन आयोग का काम जमीनी लोकतंत्र से सीधा जुड़ा है। RAS में इसे राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय निकाय चुनावों से, जबकि UPSC में संवैधानिक निकायों और चुनावी प्रशासन से जोड़ा जा सकता है।