प्रकाशित: 2 मार्च 2026समाचार स्रोतराजस्थान
राजस्थान ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए 31 साल पुराने दो बच्चों के नियम को समाप्त किया; विधानसभा ने संशोधन विधेयक पारित किए
राजस्थान विधानसभा ने मार्च 2026 की शुरुआत में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। इससे पिछले 31 वर्षों से लागू वह दो-बच्चों का नियम समाप्त हो गया, जिसके तहत पंचायती राज चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते थे। शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए यही शर्त हटाने वाला राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक भी बाद में पारित किया गया।
मूल दो-बच्चों का नियम राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में लाया गया था। संशोधन अधिनियम की धारा 19 में बदलाव करता है और दो-बच्चों की शर्त के साथ-साथ कुष्ठ रोग-आधारित अयोग्यता को भी हटाता है; कुष्ठ रोग-आधारित अयोग्यता को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुका है।
यह निरसन राष्ट्रीय महिला आयोग की सिफारिशों, निर्वाचन अधिकारों पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायशास्त्र और केंद्र सरकार की सलाह के अनुरूप है। RPSC RAS की तैयारी के लिए यह संशोधन राजस्थान राजनीति, पंचायती राज, लोक प्रशासन और लैंगिक समानता विषयों के लिए महत्वपूर्ण है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
स्थानीय निकाय चुनावों के लिए दो-बच्चा पात्रता नियम हटाने का राजस्थान का निर्णय मुख्य रूप से किस श्रेणी में आता है?
व्याख्या · सही उत्तर Cराजस्थान ने पंचायती राज और नगरपालिका कानूनों में संशोधन कर स्थानीय निकाय चुनावों के उम्मीदवारों के लिए दो-बच्चा पात्रता नियम हटाया। यह बदलाव चुनावी पात्रता और स्थानीय शासन के नियमों से जुड़ा है, इसलिए यह शासन और नीति का विषय है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान में दो-बच्चा नियम क्या था और यह कब लागू हुआ था?
दो-बच्चा नियम 1994 में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू की गई एक पात्रता शर्त थी। इसके तहत दो से अधिक बच्चों वाला कोई भी व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता था। 31 साल बाद पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 के ज़रिए इसे समाप्त किया गया।
पंचायती राज संस्थाओं की स्थापना किस संवैधानिक संशोधन से हुई और अनुच्छेद 40 क्या निर्देश देता है?
73वें संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं को लोकतांत्रिक सरकार के तीसरे स्तर के रूप में स्थापित किया। संविधान का अनुच्छेद 40 राज्य को ग्राम पंचायतें संगठित करने और उन्हें स्वशासन की इकाई के रूप में सशक्त बनाने का आदेश देता है।
दो-बच्चा नियम समाप्त करना महिलाओं और हाशिये के समुदायों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दो-बच्चा नियम का असर महिलाओं और हाशिये के समुदायों पर अधिक पड़ता था, क्योंकि परिवार नियोजन के निर्णयों पर उनका नियंत्रण अक्सर कम होता है। इसे हटाने से स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ेगी और राजस्थान 73वें संशोधन की समावेशी भावना के अनुरूप होगा।
राजस्थान में कितनी ग्राम पंचायतें हैं और उनका संगठन कैसे है?
राजस्थान में 33 जिलों की 352 पंचायत समितियों में 11,341 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की यह त्रि-स्तरीय संरचना राज्य में ग्रामीण स्वशासन की रीढ़ है।
किन अन्य राज्यों में भी ऐसे दो-बच्चा नियम थे और राष्ट्रीय रुझान क्या रहा है?
मध्य प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ऐसे नियम लागू किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आमतौर पर इनकी वैधता बनाए रखी, लेकिन अनेक राज्यों ने इन्हें धीरे-धीरे शिथिल या निरस्त किया क्योंकि ये जनसंख्या नियंत्रण की बजाय गरीब और हाशिये के वर्गों को अधिक प्रभावित कर रहे थे।