प्रकाशित: 23 मार्च 2026समाचार स्रोतराजस्थान
राजस्थान ने पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों के लिए तीन दशक पुराना दो बच्चों का मानदंड समाप्त किया
राजस्थान विधानसभा ने 9 मार्च 2026 को राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया, जिसमें पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए दो-बच्चा पात्रता मानदंड समाप्त किया गया — यह नियम पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार के समय से 31 वर्षों से लागू था। शहरी निकाय चुनावों में भी इसी प्रतिबंध को हटाने वाला राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) विधेयक बाद में पारित हुआ।
संशोधन के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 हटाई गई, जो दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख पदों के लिए चुनाव लड़ने से रोकती थी। इस मानदंड को समाप्त करने के पीछे बदली हुई जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का तर्क है: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 2.0 — प्रतिस्थापन स्तर से नीचे — हो गई है, जिससे जनसंख्या-नियंत्रण आधारित चुनावी अयोग्यता अनावश्यक हो गई है।
आलोचकों ने लंबे समय से तर्क दिया था कि यह मानदंड महिलाओं और हाशिए के समुदायों को स्थानीय शासन से असमानुपातिक रूप से बाहर करता था। राजस्थान नवीनतम BJP-शासित राज्य बन गया है जिसने यह प्रतिबंध हटाया।
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राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2026 किस पुराने प्रावधान को हटाने के लिए पारित किया गया था, जिससे स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारी सीमित होती थी?
व्याख्या · सही उत्तर Bराजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 में संशोधन कर दो से अधिक बच्चों से जुड़ी अयोग्यता और उससे संबंधित प्रावधानों को हटाया। इससे पंचायती राज चुनावों में लागू पुराना दो-बच्चा मानदंड समाप्त हुआ। विकल्प C और D इस संदर्भ में वास्तविक प्रावधान नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान के पंचायती राज और नगर पालिका संशोधन विधेयक (मार्च 2026) ने क्या बदला?
9 मार्च 2026 को पारित इन विधेयकों ने 31 साल पुराने दो-बच्चा मानदंड को समाप्त किया। इस मानदंड के तहत राजस्थान में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और नगरीय निकाय चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को अयोग्य ठहराया जाता था।
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में दो-बच्चा मानदंड किस प्रावधान के तहत लागू था?
दो-बच्चा मानदंड राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 के तहत लागू था। 2026 के संशोधन ने इस अयोग्यता प्रावधान को पूरी तरह हटा दिया।
राजस्थान में दो-बच्चा मानदंड समाप्त करने का आधार किन जनसांख्यिकीय आँकड़ों को बनाया गया?
भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 2.0 हो गई है, जो जनसंख्या के प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे है। इसलिए चुनावी पात्रता के लिए दो-बच्चा मानदंड जनसांख्यिकीय दृष्टि से अप्रासंगिक हो गया था।
किन राज्यों ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए दो-बच्चा मानदंड समाप्त किया है और किन राज्यों में यह अभी भी है?
राजस्थान ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की तरह दो-बच्चा मानदंड समाप्त किया। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अभी भी यह नियम लागू है।
राजस्थान के दो-बच्चे के मानदंड में संशोधन की RPSC परीक्षा में क्या प्रासंगिकता है?
यह विषय RPSC के लिए पंचायती राज पर 73वें संविधान संशोधन (1992), स्थानीय स्वशासन, चुनावी अयोग्यता कानूनों और भारत की जनसांख्यिकीय एवं जनसंख्या नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।