राजस्थान में राजेश्वर सिंह की मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्ति राज्य की स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ी अहम समसामयिकी है। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने उन्हें मधुकर गुप्ता के स्थान पर नियुक्त किया। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और उनके पास 35 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव है। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सूची में राजेश्वर सिंह का कार्यकाल 19.09.2025 से जारी दिखाया गया है, इसलिए यह तथ्य सितंबर 2025 की समसामयिकी में राज्य राजनीति और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

राज्य निर्वाचन आयोग का महत्व केवल किसी व्यक्ति की नियुक्ति भर नहीं है। राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग जुलाई 1994 में संविधान के अनुच्छेद 243K के तहत गठित हुआ। आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार करने और चुनाव कराने का संवैधानिक काम करता है। अनुच्छेद 243K पंचायतों के चुनावों में मतदाता सूची और चुनाव संचालन पर अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित करता है। अनुच्छेद 243ZA नगरीय निकायों के चुनावों के लिए यही व्यवस्था राज्य निर्वाचन आयोग से जोड़ता है।

परीक्षा के दृष्टिकोण से इस नियुक्ति को राजस्थान प्रशासन, स्थानीय स्वशासन और संवैधानिक संस्थाओं के साथ पढ़ना चाहिए। RAS और अन्य राज्य परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं कि राजस्थान के नए मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त कौन हैं, उन्होंने किसका स्थान लिया, उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि क्या है और राज्य निर्वाचन आयोग किन चुनावों से जुड़ा है। UPSC तैयारी में इसे 73वें और 74वें संविधान संशोधन, पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों के चुनाव और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता के उदाहरण के रूप में याद रखा जा सकता है। स्टैटिक जीके में अनुच्छेद 243K और 243ZA को राजस्थान के वर्तमान उदाहरण के साथ पढ़ना उपयोगी रहेगा।