राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने 17 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी राजेश्वर सिंह को राजस्थान का नया मुख्य राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। वे मधुकर गुप्ता के उत्तराधिकारी बने। यह नियुक्ति राजस्थान की स्थानीय चुनाव व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकायों के चुनावों से जुड़ा संवैधानिक निकाय है।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग जुलाई 1994 में गठित हुआ था। आयोग एक सदस्यीय संस्था है, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त करते हैं। इसका मुख्य काम पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों के लिए मतदाता सूचियां तैयार कराना तथा चुनाव कराना है। पंचायत चुनावों के संदर्भ में संविधान का अनुच्छेद 243K अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित करता है। नगरपालिकाओं के लिए यही संवैधानिक व्यवस्था अनुच्छेद 243ZA में राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ती है। ये प्रावधान 73वें और 74वें संविधान संशोधनों से जुड़े स्थानीय स्वशासन ढांचे का हिस्सा हैं। इसलिए यह विषय राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और भारतीय राजव्यवस्था, दोनों में पढ़ा जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से राजेश्वर सिंह की नियुक्ति एक तथ्यात्मक समसामयिकी बिंदु है, जबकि आयोग की संवैधानिक स्थिति स्टैटिक जीके से जुड़ती है। RAS/UPSC और राजस्थान की अन्य परीक्षाओं में इससे नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी, अनुच्छेद 243K, अनुच्छेद 243ZA, पंचायत और नगरपालिका चुनावों का दायरा, तथा भारत निर्वाचन आयोग से अंतर जैसे सवाल बन सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनावों से जुड़ा है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों के चुनावों को संभालता है। रिवीजन में इसे केवल नाम याद रखने वाला तथ्य न मानकर संवैधानिक प्रावधानों से जोड़कर पढ़ना चाहिए। मुख्य परीक्षा में यह विषय स्थानीय स्वशासन, चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़ा जा सकता है।
