भारत ने सितंबर 2025 में GST 2.0 सुधार लागू किया। इसका मुख्य बदलाव यह है कि पहले की 5%, 12%, 18% और 28% वाली चार-स्लैब संरचना की जगह 5% और 18% की सरल दो-स्लैब संरचना अपनाई गई। पहले की GST व्यवस्था में दरों की अधिक संख्या से वस्तुओं के वर्गीकरण, अनुपालन और विवादों का बोझ बढ़ता था। नई संरचना का मकसद इस बोझ को घटाना और व्यापार के लिए कर-प्रक्रिया को आसान बनाना है।

इस सुधार के तहत सीमेंट, ऑटो पार्ट्स और बड़े घरेलू उपकरणों पर दरें कम की गईं। परीक्षा की दृष्टि से यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीमेंट का सीधा नाता निर्माण, रियल एस्टेट और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र से है, जबकि ऑटो पार्ट्स वाहन उद्योग और बड़े उपकरण टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की माँग से संबंधित हैं। दरों में कमी से उपभोक्ताओं और कारोबारों पर कर का बोझ घटने की उम्मीद है।

GST 2.0 का सीधा संबंध अप्रत्यक्ष कर-सुधार, एकल राष्ट्रीय बाजार और कारोबार सुगमता से है, क्योंकि सरल दर-संरचना वर्गीकरण विवादों और अनुपालन लागत को घटा सकती है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, इस सुधार से GDP वृद्धि में 0.1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है। स्टैटिक जीके के लिए GST का संवैधानिक आधार भी याद रखना उपयोगी है: अनुच्छेद 246A संसद और राज्य विधानमंडलों को वस्तु एवं सेवा कर पर कानून बनाने की समवर्ती शक्ति देता है, और GST परिषद दरों, छूट और नीति संबंधी फैसलों का प्रमुख संवैधानिक निकाय है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे प्रीलिम्स में दर-संरचना, संवैधानिक आधार और लाभान्वित क्षेत्रों पर तथ्यात्मक प्रश्न बन सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में कर-सुधार, अनुपालन बोझ और एकल राष्ट्रीय बाजार पर विश्लेषण पूछा जा सकता है।