अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 28 जनवरी 2026 को एक देश-केंद्रित लेख प्रकाशित किया, जिसमें बताया गया कि यदि भारत कारोबारी नवाचार को बेहतर बढ़ावा दे और प्रतिस्पर्धा तथा उद्यमिता की बाधाएँ दूर करे, तो देश की आर्थिक उत्पादकता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। IMF ने बताया कि 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि 6.5% अनुमानित है, लेकिन कुल कारक उत्पादकता (TFP) विकास के समान चरण में मौजूद अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पीछे है। उत्पादकता बढ़ाने के तीन प्रमुख उपाय हैं: SME के लिए वित्त तक पहुँच का विस्तार, नियामक जटिलता में कमी, और प्रौद्योगिकी अपनाने में सुधार। IMF ने महिला श्रम बल भागीदारी दर पर भी ध्यान आकर्षित किया, जो अप्रैल 2026 में पीएलएफएस के अनुसार 33.9% थी, साथ ही प्रतिवर्ष कार्यबल में प्रवेश करने वाले 1.2 करोड़ युवाओं के लिए पर्याप्त औपचारिक रोजगार सृजन की आवश्यकता भी रेखांकित की। राजस्थान के संदर्भ में, राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट ने ₹35 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा था।
IMF ने भारत में उत्पादकता बढ़ने की क्षमता बताई: व्यापार, नवाचार और बाधाएँ हटाने से उत्पादकता 40% बढ़ सकती है; 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.5%
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 28 जनवरी 2026 को भारत पर केंद्रित एक लेख प्रकाशित किया। इसमें बताया गया कि यदि भारत व्यापार नवाचार को बेहतर बढ़ावा दे और प्रतिस्पर्धा तथा उद्यमिता की बाधाएँ दूर करे, तो देश की आर्थिक उत्पादकता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। IMF ने बताया कि भारत की GDP वृद्धि 2026 के लिए 6.5% अनुमानित है, लेकिन कुल कारक उत्पादकता (TFP) विकास के समान चरण में मौजूद अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पीछे है। उत्पादकता बढ़ाने के तीन प्रमुख साधन हैं: SME के लिए वित्त तक पहुँच बढ़ाना, नियामकीय जटिलता कम करना और प्रौद्योगिकी अपनाने में सुधार करना। IMF ने महिला श्रम बल भागीदारी (लगभग 24%) और हर साल कार्यबल में प्रवेश करने वाले 1.2 करोड़ युवाओं के लिए पर्याप्त औपचारिक रोजगार सृजन की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया। राजस्थान के संदर्भ में, राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट ने ₹35 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा था।
मुख्य तथ्य
- IMF रिपोर्ट के अनुसार नवाचार को समर्थन देने और बाधाएँ हटाने से उत्पादकता 40% बढ़ सकती है।
- IMF ने 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि 6.5% रहने का अनुमान लगाया।
- तीन प्रमुख साधन: SME के लिए वित्त तक पहुँच, नियामकीय सरलीकरण और प्रौद्योगिकी अपनाना।
- अप्रैल 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिला श्रम बल भागीदारी दर 33.9% थी।
- प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ युवा भारतीय कार्यबल में प्रवेश करते हैं जिन्हें औपचारिक रोजगार चाहिए।
- राइजिंग राजस्थान समिट ने ₹35 लाख करोड़ निवेश प्रतिबद्धता का लक्ष्य रखा था।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: आईएमएफ के 2026 आकलन में भारत की उत्पादकता क्षमता का विश्लेषण कीजिए। यह किन संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करता है, और ये राजस्थान की मुख्यतः कृषि और लघु-मध्यम उद्यम आधारित अर्थव्यवस्था पर कैसे लागू होते हैं?
उत्तर (50 शब्द):
आईएमएफ के जनवरी 2026 फोकस ने भारत की जीडीपी 6.5% अनुमानित की तथा नवाचार को बढ़ावा देकर 40% उत्पादकता वृद्धि का आकलन किया। सिफारिशें: एसएमई के लिए वित्त तक पहुँच, नियामक सरलीकरण, प्रौद्योगिकी अपनाना। महिला श्रम भागीदारी 24%; प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ युवा कार्यबल में। राजस्थान का ₹35 लाख करोड़ राइजिंग निवेश शिखर सम्मेलन इन सुधारों के अनुरूप है।
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जनवरी 2026 में जारी आईएमएफ की भारत-केंद्रित रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत व्यावसायिक नवाचार को बढ़ावा दे, तो उसकी उत्पादकता वृद्धि लगभग कितने प्रतिशत तक बढ़ सकती है?
IMF के लेख के अनुसार, व्यावसायिक नवाचार को मजबूत करने और कारोबार से जुड़ी बाधाएं घटाने से भारत की उत्पादकता वृद्धि लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IMF की जनवरी 2026 रिपोर्ट में भारत की उत्पादकता वृद्धि क्षमता के बारे में क्या कहा गया?
28 जनवरी 2026 को प्रकाशित IMF के देश-केंद्रित लेख में कहा गया कि यदि भारत कारोबारी नवाचार को बेहतर बढ़ावा दे और प्रतिस्पर्धा व उद्यमिता में आने वाली बाधाएँ हटाए, तो आर्थिक उत्पादकता में लगभग 40% की वृद्धि हो सकती है। IMF ने बताया कि 2026 के लिए भारत की GDP वृद्धि 6.5% अनुमानित है, लेकिन कुल कारक उत्पादकता (TFP) विकास के समान चरण वाली अन्य अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है।
IMF ने भारत की कुल कारक उत्पादकता बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख साधन क्या बताए?
IMF ने TFP बढ़ाने के तीन प्रमुख साधन बताए: (1) SME की औपचारिक वित्त तक पहुँच बढ़ाना — छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रौद्योगिकी में निवेश और विस्तार के लिए सक्षम करना; (2) नियामक सरलीकरण — अनुपालन बोझ कम करना और व्यापार करने की सुगमता सुधारना; (3) प्रौद्योगिकी अपनाने में तेजी — कृषि, उद्योग और सेवाओं में डिजिटल उपकरण, स्वचालन और हरित प्रौद्योगिकी।
भारत की महिला श्रम बल भागीदारी दर उसकी उत्पादकता चुनौती के बारे में क्या बताती है?
भारत की महिला श्रम बल भागीदारी दर लगभग 24% है, जो वैश्विक औसत लगभग 50% से काफी कम है और दुनिया में सबसे कम दरों में गिनी जाती है। इससे मानव पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता। IMF रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की उत्पादकता और GDP वृद्धि की महत्वाकांक्षाओं के लिए महिला कार्यबल भागीदारी बढ़ाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि भागीदारी में प्रत्येक प्रतिशत की वृद्धि GDP में मापनीय योगदान देती है।
कुल कारक उत्पादकता (TFP) क्या है और भारत के 2047 विकसित भारत लक्ष्य के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
कुल कारक उत्पादकता (TFP) यह मापती है कि पूंजी, श्रम और प्रौद्योगिकी जैसे सभी आदानों को कितनी कुशलता से उत्पादन में बदला जाता है। यह आर्थिक वृद्धि का वह हिस्सा है जिसे केवल आदानों की वृद्धि से नहीं समझाया जा सकता। भारत के विकसित भारत 2047 लक्ष्य के लिए दो दशकों तक 8%+ की वार्षिक वृद्धि आवश्यक है। नवाचार, बेहतर प्रबंधन और प्रौद्योगिकी से TFP वृद्धि इसके लिए अपरिहार्य है।
IMF की उत्पादकता रिपोर्ट राजस्थान के आर्थिक विकास के संदर्भ में कैसे प्रासंगिक है?
राजस्थान IMF के तीनों उत्पादकता उपायों से सीधे जुड़ा है। राइजिंग राजस्थान समिट (दिसंबर 2024) ने ₹35 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य रखा — लेकिन केवल निवेश पर्याप्त नहीं है; TFP सुधार भी चाहिए। राजस्थान की महिला श्रम भागीदारी राष्ट्रीय औसत से भी कम है, वस्त्र और हस्तशिल्प में SME क्षेत्र वित्त तक पहुँच की कमी से जूझता है, और नियामक सरलीकरण एक प्राथमिकता बनी हुई है।
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