आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 बताता है कि भारत का बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र मज़बूत स्थिति में है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) अनुपात सितंबर 2025 में घटकर 2.2% रह गया, जो कई दशकों का सबसे निचला स्तर है। शुद्ध NPA अनुपात अब तक के न्यूनतम स्तर 0.5% पर पहुँच गया। पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) 17.2% पर मज़बूत रहा, जो नियामकीय आवश्यकताओं से काफ़ी अधिक था।

दिसंबर 2025 में SCB की ऋण वृद्धि सालाना आधार पर 14.5% रही। यह वित्त वर्ष 2025-26 की सर्वाधिक वृद्धि थी, जबकि दिसंबर 2024 में यह 11.2% थी। नवंबर 2025 में व्यक्तिगत ऋणों में 12.8% की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज हुई; इसकी मुख्य वजह सोने के आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋणों में तेज़ बढ़ोतरी थी।

कैलेंडर वर्ष 2024 में वित्तीय क्षेत्र की कुल परिसंपत्तियाँ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 187% के बराबर रहीं। पूंजी बाज़ार कैलेंडर वर्ष 2017 में GDP के 144% से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2024 में 175% हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 235 लाख डीमैट खाते जुड़े, जिससे इनकी कुल संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। सितंबर 2025 तक अलग-अलग निवेशकों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हो गई, जिनमें लगभग 25% महिलाएँ थीं। म्यूचुअल फंड में अलग-अलग निवेशकों की संख्या 5.9 करोड़ तक पहुँच गई।

वित्तीय समावेशन में भी बड़ी प्रगति हुई। प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) के तहत मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ खाते थे। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत अक्टूबर 2025 तक 55.45 करोड़ खातों के ज़रिए ₹36.18 लाख करोड़ वितरित किए गए।