प्रकाशित: 23 अक्टूबर 2025DD News / PIBटॉपिक
प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड: दो नए चूजों का जन्म, बंदी प्रजनन में संख्या 70 हुई
प्रोजेक्ट गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का अहम उदाहरण है। राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में दो नए चूजों का जन्म इस कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि है। इनमें एक चूजा प्राकृतिक प्रजनन से और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान से जन्मा, जिससे बंदी अवस्था में रखे गए गोडावण की कुल संख्या 70 हो गई। वन्य अवस्था में इस पक्षी की संख्या 150-200 से भी कम मानी जाती है और इसका मुख्य फैलाव राजस्थान और गुजरात में बचा है। 1982 के मुकाबले इसकी संख्या 80% से अधिक घट चुकी है। परीक्षा में यह मामला संकटग्रस्त प्रजाति संरक्षण, जैव विविधता और संरक्षण में विज्ञान-तकनीक के उपयोग का समसामयिक उदाहरण देता है।
गोडावण को आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इसकी घटती आबादी के पीछे कृषि विस्तार, बुनियादी ढांचे के विकास से आवास का नुकसान, बिजली लाइनों से टक्कर, शिकार और प्रजनन स्थलों पर बाधा जैसी चुनौतियां बताई जाती हैं। कृत्रिम गर्भाधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वन्य आबादी बहुत कम और बिखरी हुई है; ऐसे में बंदी प्रजनन से सुरक्षित आबादी तैयार करने और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इस साल बंदी प्रजनन से जन्मे कुछ चूजों को नियंत्रित तरीके से जंगल में छोड़ने की संभावना भी संरक्षण के अगले कठिन चरण को दिखाती है।
ब्यावर में सूचना का अधिकार संग्रहालय की नींव रखे जाने का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। ब्यावर को सूचना का अधिकार आंदोलन की जन्मभूमि से जोड़ा जाता है। इसलिए यह तथ्य शासन-सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की दृष्टि से उपयोगी है। RAS और UPSC की तैयारी में इस विषय को दो हिस्सों में पढ़ना चाहिए: पहला, गोडावण संरक्षण का पर्यावरणीय और तकनीकी पक्ष; दूसरा, ब्यावर और सूचना का अधिकार आंदोलन का शासन-संबंधी पक्ष।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
अक्टूबर 2024 में राजस्थान के किस शहर में RTI संग्रहालय की आधारशिला रखी गई, जिसे RTI आंदोलन का जन्मस्थान माना जाता है?
व्याख्या · सही उत्तर BRTI संग्रहालय की आधारशिला 20 अक्टूबर 2024 को राजस्थान के ब्यावर में जश्न-ए-संविधान: लोकतंत्र और सूचना का अधिकार महोत्सव के दौरान रखी गई। ब्यावर को RTI आंदोलन के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रोजेक्ट गोडावण क्या है?
यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त गोडावण के संरक्षण के लिए भारत का बंदी प्रजनन कार्यक्रम है। इसे भारतीय वन्यजीव संस्थान और राजस्थान सरकार के सहयोग से राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में चलाया जा रहा है।
हाल की प्रमुख उपलब्धि क्या रही?
राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में दो नए चूजे जन्मे। इनमें एक प्राकृतिक प्रजनन से और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान से जन्मा, जिससे बंदी अवस्था में कुल संख्या 70 हो गई।
वन्य अवस्था में गोडावण की स्थिति कैसी है?
वन्य अवस्था में 150-200 से भी कम गोडावण बचे हैं। इनका मुख्य फैलाव राजस्थान और गुजरात में है, और 1982 के मुकाबले संख्या 80% से अधिक घट चुकी है।
कृत्रिम गर्भाधान संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
वन्य आबादी बहुत कम और बिखरी हुई है, इसलिए प्राकृतिक जोड़े बनना कठिन हो सकता है। कृत्रिम गर्भाधान बंदी अवस्था में आबादी बढ़ाने और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
ब्यावर का सूचना का अधिकार संग्रहालय परीक्षा के लिए क्यों प्रासंगिक है?
ब्यावर सूचना का अधिकार आंदोलन की जन्मभूमि से जुड़ा है। इसलिए यह संग्रहालय पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक अधिकार और राजस्थान के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है।