पंचायती राज मंत्रालय ने 29 अप्रैल 2026 को बताया कि उसने 24 अप्रैल 2026 को मनाए गए राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट प्रत्येक पंचायत के रिपोर्ट कार्ड की तरह काम करती है और मापनीय स्थानीय शासन परिणामों के आधार पर समावेशी ग्रामीण विकास में मदद के लिए बनाई गई है। समग्र अंकों के आधार पर 3,635 ग्राम पंचायतें अग्रणी श्रेणी में रखी गईं, जबकि 1,18,824 ग्राम पंचायतें और परंपरागत स्थानीय निकाय, यानी भाग लेने वाली इकाइयों के लगभग 45.72 प्रतिशत, प्रदर्शनकर्ता श्रेणी में रखे गए।
सबसे मजबूत विषय पंचायत में गरीबी-मुक्त और उन्नत आजीविका तथा स्वस्थ पंचायत रहे। पहले विषय के अंतर्गत 3,313 ग्राम पंचायतों या परंपरागत स्थानीय निकायों ने ए प्लस श्रेणी प्राप्त की, जो गरीबी घटाने और आजीविका सृजन में प्रदर्शन को दर्शाती है। स्वस्थ पंचायत विषय में 1,015 इकाइयों ने ए प्लस श्रेणी प्राप्त की, जिससे निवारक स्वास्थ्य सेवा, पोषण जागरूकता, स्वच्छता व्यवहार और सामुदायिक भागीदारी में परिणाम दिखाई दिए। भागीदारी 97.30 प्रतिशत रही, जिसमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने सत्यापित आंकड़े जमा किए, जबकि पहले संस्करण में यह 80.79 प्रतिशत थी।
मंत्रालय ने कहा कि पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 आंकड़े दर्ज करने के एकीकृत प्रपत्र, अनिवार्य ग्राम सभा सत्यापन, राष्ट्रीय पोर्टलों से आंकड़ों के अधिक स्वचालित आदान-प्रदान, परस्पर आंकड़ा सत्यापन, रियल-टाइम डैशबोर्ड और स्थानीय भाषाओं की सुविधा से पारदर्शिता सुधारता है। यह सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण से जुड़े नौ विषयों में 150 संकेतकों और 230 आंकड़ा बिंदुओं के आधार पर 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का आकलन करता है। पहले के 516 संकेतकों और 794 आंकड़ा बिंदुओं वाले ढांचे को युक्तिसंगत किया गया है। पंचायतों को उपलब्धिकर्ता, अग्रणी, प्रदर्शनकर्ता, आकांक्षी या प्रारंभिक श्रेणियों में रखा जाता है, जिससे आपसी तुलना, प्रतिस्पर्धा और लक्षित हस्तक्षेप संभव होते हैं।
