12 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 नवंबर के लाल किला कार विस्फोट को आतंकी घटना बताया और तत्काल जांच का निर्देश दिया। 14 मई 2026 को दाखिल NIA आरोपपत्र के अनुसार लाल किले के पास वाहन में लगाए गए विस्फोटक उपकरण के विस्फोट में 11 लोगों की मृत्यु हुई और कई घायल हुए। NIA ने मृत मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान की, और सभी आरोपी अल-कायदा (भारतीय उपमहाद्वीप) की उपशाखा अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (एजीयूएच) से जुड़े थे। विस्फोट में आरोपियों द्वारा गुप्त रूप से निर्मित ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (टीएटीपी) का प्रयोग हुआ। दिल्ली पुलिस/NIA ने मामला गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक अधिनियम के तहत दर्ज किया। जांच व्यापक साजिश और फरीदाबाद से जुड़ी गतिविधि पर केंद्रित रही; विस्फोटक बरामदगी की सटीक मात्रा को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग थीं, इसलिए पूर्व में बताया गया 3,000 किलो आँकड़ा अधिकृत स्रोत के अभाव में हटा दिया गया है। मामले ने शिक्षित पेशेवरों के कट्टरपंथीकरण पर चिंता रेखांकित की।