गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026, 30 जनवरी 2026 को सम्पन्न हुआ और यह देश का प्रमुख ऊर्जा कूटनीति एवं निवेश प्लेटफ़ॉर्म बनकर उभरा। इस आयोजन में तेल अन्वेषण, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), संपीड़ित बायोगैस (CBG) और हरित हाइड्रोजन क्षेत्रों में 12 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

रणनीतिक दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण समझौता ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के बीच हुआ, जिसके तहत घरेलू हाइड्रोकार्बन बेसिन के संयुक्त अन्वेषण के लिए संसाधनों को जोड़ा जाएगा। इससे कच्चे तेल की आयात निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

न्यूमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) और TotalEnergies ने ओडिशा के पारादीप में 200,000 टन प्रतिवर्ष (KTPA) क्षमता के SAF संयंत्र के लिए ऐतिहासिक समझौता किया। कृषि अपशिष्ट, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और प्रयुक्त खाना पकाने के तेल से बनने वाला SAF विमानन क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।

सरकार ने 2030 तक प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क में 5% CBG मिश्रण का लक्ष्य घोषित किया। CBG जैविक अपशिष्ट से बनती है और SATAT योजना के अंतर्गत 5,000 CBG संयंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से जुड़ी है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र को अगले दशक में 500 अरब डॉलर के अवसर के रूप में बताया। उल्लेखनीय है कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र (Nuclear Energy Zone) की अवधारणा इस आयोजन में पहली बार सामने आई, जो परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन के बाद निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए समर्पित निवेश क्षेत्र बनाने की सरकार की मंशा का संकेत देती है।