प्रकाशित: 24 अक्टूबर 2025टॉपिक
राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना में भारतीय हिमालय में 718 हिम तेंदुए दर्ज
भारत ने '#23for23' अभियान के तहत अपनी पहली राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना जारी की, जिसमें भारतीय हिमालय के 718 हिम तेंदुए दर्ज हुए। लद्दाख में सबसे अधिक 477 हिम तेंदुए दर्ज हुए। इसके बाद उत्तराखंड (124), हिमाचल प्रदेश (51), अरुणाचल प्रदेश (36), सिक्किम (21) और जम्मू-कश्मीर (9) रहे।
यह जनगणना वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम (GSLEP) का हिस्सा है। IUCN ने हिम तेंदुए को 'सुभेद्य' श्रेणी में रखा है और यह प्रजाति मध्य व दक्षिण एशिया के 12 देशों में पाई जाती है। भारत में प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड 2009 में शुरू हुआ और यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है। जनगणना में हिम तेंदुओं की मौजूदगी के आधार पर नमूना चयन, उनकी मौजूदगी के संकेतों का सर्वेक्षण और कैमरा ट्रैप से संख्या का आकलन किया गया।
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Tपर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन
Tजैव विविधता एवं संरक्षण
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में हिम तेंदुओं की आबादी के पहले आकलन में क्या पाया गया?
भारत की **राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना** में हिमालयी राज्यों के **718 हिम तेंदुए** दर्ज किए गए। इनमें **सबसे अधिक 477 हिम तेंदुए लद्दाख** में मिले, जबकि शेष 241 हिम तेंदुए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर में हैं।
क्या भारत में 718 हिम तेंदुओं का दर्ज होना संरक्षण के लिहाज़ से अच्छा संकेत है या चिंता की बात?
पहली बार दर्ज **718 की संख्या उत्साहजनक है**। यह पिछले अनुमानों से अधिक है और भारत के संरक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। हालांकि, यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर **सुभेद्य** (IUCN) बनी हुई है। हिम तेंदुओं की यह संख्या बनी रहे, इसके लिए उनके आवासों की सुरक्षा जारी रखना ज़रूरी है।
भारत में हिम तेंदुए किस तरह के आवास में पाए जाते हैं?
हिम तेंदुए हिमालय और ट्रांस-हिमालयी पर्वत श्रेणियों में **3,000 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित अल्पाइन और उप-अल्पाइन आवासों** में पाए जाते हैं। इनमें लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के ठंडे मरुस्थल, चट्टानी भूभाग और घास के मैदान शामिल हैं।
भारत में हिम तेंदुओं की आबादी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत से कैसे जुड़ी है?
एक **शीर्ष शिकारी** के रूप में हिम तेंदुआ नीली भेड़, आइबेक्स और मर्मोट जैसे शिकार जीवों की संख्या नियंत्रित करके हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का **संतुलन** बनाए रखता है। हिम तेंदुओं की स्वस्थ आबादी बताती है कि हिमालय का खाद्य-जाल ठीक तरह से काम कर रहा है।
हिम तेंदुआ संरक्षण के प्रति भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता क्या है?
भारत **वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम (GSLEP)** का हस्ताक्षरकर्ता है। यह कार्यक्रम 2013 में शुरू हुआ था। इसके तहत हिम तेंदुओं वाले देश मिलकर संरक्षण करते हुए दुनिया भर में **हिम तेंदुओं के 20 भू-दृश्यों** को 2020 तक और उसके बाद भी सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।