प्रकाशित: 23 अक्टूबर 2025टॉपिक
राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना में भारतीय हिमालय में 718 हिम तेंदुए दर्ज
भारत ने '#23for23' अभियान के तहत अपनी पहली राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना जारी की, जिसमें भारतीय हिमालय में 718 हिम तेंदुए दर्ज हुए। लद्दाख में सर्वाधिक 477 हिम तेंदुए दर्ज हुए, उसके बाद उत्तराखंड (124), हिमाचल प्रदेश (51), अरुणाचल प्रदेश (36), सिक्किम (21) और जम्मू-कश्मीर (9) रहे।
यह जनगणना वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम (GSLEP) का हिस्सा है। IUCN द्वारा 'सुभेद्य' वर्गीकृत हिम तेंदुए 12 देशों में पाए जाते हैं। भारत ने 2009 में प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड शुरू किया और यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में संरक्षित है। जनगणना में स्थानों पर मौजूदगी के आधार पर नमूना चयन, संकेत सर्वेक्षण और कैमरा-ट्रैप के आधार पर संख्या आकलन का उपयोग हुआ।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में हिम तेंदुए की आबादी के पहले आकलन में क्या पाया गया?
भारत की **राष्ट्रीय हिम तेंदुआ जनगणना** में हिमालयी राज्यों में **718 हिम तेंदुए** दर्ज किए गए। इनमें **सबसे अधिक 477 लद्दाख** में मिले, जबकि शेष 241 हिम तेंदुए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में हैं।
क्या 718 हिम तेंदुए भारत के संरक्षण के लिए अच्छी या चिंताजनक संख्या है?
**718 की संख्या एक सकारात्मक आधार** है — पिछले अनुमानों से अधिक — जो भारत के संरक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। हालांकि, यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर **'असुरक्षित' (IUCN)** बनी हुई है।
भारत में हिम तेंदुए किस तरह के आवास में पाए जाते हैं?
हिम तेंदुए हिमालय और ट्रांस-हिमालयी पर्वत श्रेणियों में **3,000 मीटर से ऊपर के ऊंचाई वाले अल्पाइन और उप-अल्पाइन आवासों** में पाए जाते हैं। इनमें लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के ठंडे रेगिस्तान, चट्टानी इलाके और घास के मैदान शामिल हैं।
भारत में हिम तेंदुओं की आबादी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत से कैसे जुड़ी है?
एक **शीर्ष शिकारी** के रूप में, हिम तेंदुआ शिकार प्रजातियों की आबादी (नीली भेड़, आइबेक्स, मर्मोट) को नियंत्रित करके **हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में पारिस्थितिक संतुलन** बनाए रखता है।
हिम तेंदुआ संरक्षण के प्रति भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता क्या है?
भारत **वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम (GSLEP)** का हस्ताक्षरकर्ता है। यह कार्यक्रम 2013 में शुरू हुआ था और इसके तहत रेंज देश समन्वित संरक्षण से वैश्विक स्तर पर **20 हिम तेंदुआ परिदृश्य** सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।