भारत का लोकपाल — देश की सर्वोच्च भ्रष्टाचार-विरोधी शिकायत निवारण संस्था — ने 16 जनवरी 2026 को अपनी 12वीं स्थापना वर्षगांठ मनाई। इसी दिन लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोकपाल ने 16 जनवरी 2014 को औपचारिक रूप से कार्य प्रारंभ किया था।
इस अवसर पर लोकपाल ने एक नई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अवसंरचना का उद्घाटन किया, जिसमें एक आधुनिक डेटा सेंटर शामिल है। यह सुविधा शिकायतों की कागज रहित प्रक्रिया के लिए तैयार की गई है। इस डिजिटल उन्नयन का उद्देश्य शिकायत प्रबंधन प्रणाली को सुव्यवस्थित करना, पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करना है।
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 एक ऐतिहासिक कानून था जो 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन की प्रतिक्रिया में पारित हुआ। इस अधिनियम ने केंद्र स्तर पर लोकपाल की स्थापना की और राज्यों को इसी प्रकार की निगरानी संस्था के रूप में लोकायुक्त स्थापित करने का निर्देश दिया। लोकपाल का क्षेत्राधिकार संसद सदस्यों, मंत्रियों और केंद्र सरकार के ग्रुप ए/बी/सी/डी कर्मचारियों तक फैला है।
नई आईटी अवसंरचना भारत की भ्रष्टाचार-विरोधी शिकायत निवारण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म दूरदराज के क्षेत्रों के शिकायतकर्ताओं के लिए बाधाएं कम करते हैं और शिकायत प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
