आईएनएस तारागिरी (एफ-41) भारतीय नौसेना की नई स्टील्थ फ्रिगेट है। इसे 28 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को सौंपा और 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में नौसेना में कमीशन किया गया। यह घटना रक्षा और विज्ञान-तकनीक, दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को दिखाती है।
तारागिरी नीलगिरि श्रेणी की परियोजना 17ए फ्रिगेट है। आधिकारिक सूचना के अनुसार यह इस श्रेणी का चौथा जहाज है और मझगांव डॉक में बना तीसरा जहाज है। परियोजना 17ए फ्रिगेट को समुद्री क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों के लिए बहु-भूमिका प्लेटफ़ॉर्म के रूप में तैयार किया गया है। युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने इसका डिजाइन तैयार किया और निर्माण की निगरानी मुंबई की युद्धपोत निगरानी टीम ने की। इससे स्वदेशी डिजाइन, निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत होती दिखती है।
परीक्षा के लिए इसका महत्व तीन स्तरों पर है। प्रारंभिक परीक्षा में जहाज का नाम, श्रेणी, निर्माता, डिलीवरी तिथि और कमीशनिंग स्थान पूछे जा सकते हैं। स्टैटिक जीके में इसे भारतीय नौसेना, रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण स्वदेशी रक्षा निर्माण, समुद्री सुरक्षा और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भागीदारी के संदर्भ में उपयोगी है। आधिकारिक सूचना में परियोजना में 75% स्वदेशीकरण, 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भागीदारी और लगभग 4,000 प्रत्यक्ष तथा 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार का उल्लेख है। इसलिए यह केवल एक जहाज की डिलीवरी नहीं, बल्कि भारत के नौसैनिक आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का समसामयिकी संकेतक है।
