भारत की UNESCO विश्व धरोहर अस्थायी सूची में 2025 में 7 नए प्राकृतिक धरोहर स्थल जोड़े गए, जिससे भारत की कुल प्रविष्टियाँ 62 से बढ़कर 69 हो गईं। ये स्थल हैं: पंचगनी और महाबलेश्वर के डेक्कन ट्रैप्स (महाराष्ट्र), सेंट मेरीज आइलैंड क्लस्टर (कर्नाटक), मेघालयन एज केव्स (मेघालय), नागा हिल ओफियोलाइट (नागालैंड), एरा माट्टी डिब्बालू (आंध्र प्रदेश), तिरुमाला पहाड़ियों की प्राकृतिक धरोहर (आंध्र प्रदेश) और वर्कला क्लिफ्स (केरल)।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी 7 प्रविष्टियाँ प्राकृतिक धरोहर स्थल हैं और इनमें भूवैज्ञानिक संरचनाएँ भी शामिल हैं। सूची में पूर्वोत्तर भारत, डेक्कन क्षेत्र, आंध्र प्रदेश और केरल के स्थल शामिल होने से राज्य-स्थल मिलान सीधे पूछे जा सकते हैं। अस्थायी सूची को इसलिए याद रखना जरूरी है क्योंकि UNESCO की विश्व धरोहर सूची में औपचारिक नामांकन से पहले किसी स्थल का अस्थायी सूची में होना जरूरी माना जाता है। इसलिए यह खबर केवल संख्या बढ़ने की सूचना नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि भारत किन प्राकृतिक और भूवैज्ञानिक स्थलों को वैश्विक धरोहर मान्यता की दिशा में आगे रख रहा है।

इन 7 स्थलों में 2 पूर्वोत्तर भारत से हैं: मेघालयन एज केव्स और नागा हिल ओफियोलाइट। इससे पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक और भूवैज्ञानिक धरोहर पर ध्यान जाता है, जिसे वैश्विक धरोहर पहचान में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिला है। आंध्र प्रदेश से 2 स्थल शामिल हैं, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक, मेघालय, नागालैंड और केरल से एक-एक स्थल शामिल है। प्रारंभिक परीक्षा में सूची, राज्य-स्थल मिलान, प्राकृतिक बनाम सांस्कृतिक धरोहर और UNESCO प्रक्रिया से प्रश्न बन सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह विषय प्राकृतिक धरोहर संरक्षण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं से जोड़ा जा सकता है।