भारत और इज़राइल ने 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करना तथा उसका दायरा बढ़ाना है। यह समझौता रक्षा सहयोग पर 17वीं संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक के दौरान किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बराम ने की। यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए साझा दृष्टिकोण और नीति दिशा देता है। नए ढांचे में दोनों देशों ने रणनीतिक संवाद, प्रशिक्षण और रक्षा औद्योगिक सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा जैसे व्यापक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। समझौते की एक खास बात उन्नत तकनीकों को साझा करना और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों के संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास तथा सह-उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह केवल लेन-देन आधारित खरीद से आगे बढ़कर साझेदारी पर आधारित नवाचार की दिशा में रणनीतिक बदलाव दिखाता है। रक्षा सचिव सिंह ने इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ से अलग से मुलाकात कर JWG बैठक के परिणामों की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने आतंकवाद सहित साझा सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की और वैश्विक खतरों का मुकाबला करने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई। यह MoU भारत के आत्मनिर्भर भारत विज़न के अनुरूप है, जो इज़राइल की उन्नत रक्षा-प्रौद्योगिकी व्यवस्था के सहयोग से स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता विकसित करने पर बल देता है। साथ ही, यह भारत की एकीकृत वायु रक्षा से जुड़ी मिशन सुदर्शन चक्र अवधारणा को भी आगे बढ़ाता है।
भारत और इज़राइल ने तेल अवीव में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ाने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए
भारत और इज़राइल ने 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में संयुक्त कार्य समूह की 17वीं बैठक के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए। इसमें रणनीतिक संवाद, प्रशिक्षण, रक्षा औद्योगिक सहयोग, AI, साइबर सुरक्षा तथा उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकियों के सह-विकास को शामिल किया गया है।
मुख्य तथ्य
- MoU पर 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में 17वीं भारत-इज़राइल रक्षा सहयोग संयुक्त कार्य समूह बैठक में हस्ताक्षर हुए
- भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बराम ने सह-अध्यक्षता की
- इसमें रणनीतिक संवाद, प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा शामिल हैं
- अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी साझाकरण, सह-विकास तथा सह-उत्पादन पर विशेष जोर
- रक्षा सचिव सिंह ने JWG परिणामों पर चर्चा के लिए इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ से भी अलग मुलाकात की
- स्वदेशी रक्षा उत्पादन के लिए भारत के आत्मनिर्भर भारत विज़न के अनुरूप
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में हस्ताक्षरित भारत-इज़राइल रक्षा समझौता ज्ञापन का भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता एजेंडे के लिए रणनीतिक महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारत और इज़राइल ने 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में 17वीं संयुक्त कार्य समूह बैठक में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रणनीतिक संवाद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और सैन्य क्षेत्र में सह-विकास शामिल है। आत्मनिर्भर भारत एवं मिशन सुदर्शन चक्र के अनुरूप यह संबंध खरीद से साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।
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नवंबर 2025 में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से भारत और इज़राइल ने समझौता ज्ञापन पर कब और कहाँ हस्ताक्षर किए?
MoU पर 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में रक्षा सहयोग पर 17वीं भारत-इज़राइल संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक के दौरान हस्ताक्षर हुए, जिसकी सह-अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बराम ने की।
स्रोत: DD News
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवंबर 2025 में भारत-इज़राइल रक्षा MoU पर कब और कहाँ हस्ताक्षर हुए?
MoU पर 4 नवंबर 2025 को तेल अवीव में रक्षा सहयोग से जुड़ी 17वीं संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक के दौरान हस्ताक्षर हुए।
17वीं भारत-इज़राइल JWG रक्षा बैठक की सह-अध्यक्षता किसने की?
इसकी सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अमीर बराम ने की।
नए MoU के तहत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
MoU में रणनीतिक संवाद, प्रशिक्षण, रक्षा औद्योगिक सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा शामिल हैं, जिनमें उन्नत तकनीकों के संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन पर विशेष जोर है।
यह MoU भारत की व्यापक रक्षा नीति से कैसे मेल खाता है?
MoU भारत के आत्मनिर्भर भारत विज़न को बढ़ावा देता है, क्योंकि यह इज़राइल के साथ तकनीक साझा करने और संयुक्त विनिर्माण से स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करता है।
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