राजस्थान अपने पहले और भारत के दूसरे अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अंतिम मंज़ूरी मिलने के बाद मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिज़र्व से एक बाघिन को हवाई मार्ग से बूंदी ज़िले के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व (RVTR) लाया जाएगा। इसका उद्देश्य आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और RVTR में प्रजनन करने वाली ऐसी बाघ आबादी बसाना है जो लंबे समय तक बनी रह सके। RVTR को 2022 में राजस्थान में टाइगर रिज़र्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। बाघिन को जीपीएस रेडियो-कॉलर लगाया जाएगा, जिससे उसकी गतिविधियों और आवाजाही पर वास्तविक समय में नज़र रखी जा सके तथा संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष या तनाव के संकेतों की जल्द पहचान हो सके। RVTR हाड़ौती क्षेत्र में लगभग 1,501 वर्ग किमी में फैला है। यह उत्तर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान और दक्षिण में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है। राजस्थान वन विभाग और NTCA ने मिलकर स्थल का आकलन किया और शिकार प्रजातियों की उपलब्धता का सर्वेक्षण किया। इससे पुष्टि हुई कि यहाँ चीतल, साँभर और नीलगाय जैसे पर्याप्त शिकार तथा बाघिन के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। मध्य प्रदेश के भीतर कान्हा से पन्ना टाइगर रिज़र्व लाई गई 'साशा' बाघिन सफल बाघ पुनर्स्थापन का उदाहरण है; इस कदम ने स्थानीय विलुप्ति के बाद पन्ना की बाघ आबादी को फिर से बसाने में मदद की। RVTR में बाघिन का स्थानांतरण सफल रहा तो यह साबित होगा कि इस मॉडल से उन अन्य रिज़र्वों में भी बाघों की आबादी फिर बसाई जा सकती है, जहाँ प्रजनन करने वाले बाघ नहीं बचे हैं।
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व: राजस्थान पेंच से अपने पहले अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की तैयारी में
राजस्थान अपने पहले और भारत के दूसरे अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अंतिम मंज़ूरी मिलने के बाद मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिज़र्व से एक बाघिन को हवाई मार्ग से बूंदी ज़िले के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व (RVTR) लाया जाएगा। इसका उद्देश्य आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और RVTR में प्रजनन करने वाली ऐसी बाघ आबादी बसाना है जो लंबे समय तक बनी रह सके। RVTR को 2022 में राजस्थान में टाइगर रिज़र्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। बाघिन को जीपीएस रेडियो-कॉलर लगाया जाएगा, जिससे उसकी गतिविधियों और आवाजाही पर वास्तविक समय में नज़र रखी जा सके तथा संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष या तनाव के संकेतों की जल्द पहचान हो सके। RVTR हाड़ौती क्षेत्र में लगभग 1,501 वर्ग किमी में फैला है। यह उत्तर में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान और दक्षिण में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है। राजस्थान वन विभाग और NTCA ने मिलकर स्थल का आकलन किया और शिकार प्रजातियों की उपलब्धता का सर्वेक्षण किया। इससे पुष्टि हुई कि यहाँ चीतल, साँभर और नीलगाय जैसे पर्याप्त शिकार तथा बाघिन के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। मध्य प्रदेश के भीतर कान्हा से पन्ना टाइगर रिज़र्व लाई गई 'साशा' बाघिन सफल बाघ पुनर्स्थापन का उदाहरण है; इस कदम ने स्थानीय विलुप्ति के बाद पन्ना की बाघ आबादी को फिर से बसाने में मदद की। RVTR में बाघिन का स्थानांतरण सफल रहा तो यह साबित होगा कि इस मॉडल से उन अन्य रिज़र्वों में भी बाघों की आबादी फिर बसाई जा सकती है, जहाँ प्रजनन करने वाले बाघ नहीं बचे हैं।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान पेंच से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व में अपने पहले अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की तैयारी कर रहा है।
- रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व (RVTR) को 2022 में अधिसूचित किया गया था और यह राजस्थान के बूंदी ज़िले में स्थित है।
- बाघिन की वास्तविक समय में निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका का समय रहते पता लगाने के लिए उसे जीपीएस रेडियो-कॉलर लगाया जाएगा।
- RVTR 1,501 वर्ग किमी में फैला है और रणथंभौर तथा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व के बीच वन्यजीव गलियारा बनाता है।
- संयुक्त स्थल आकलन में चीतल, साँभर और नीलगाय जैसे शिकार की पर्याप्त उपलब्धता की पुष्टि हुई।
- कान्हा से पन्ना लाई गई बाघिन के सफल पुनर्स्थापन से पन्ना की बाघ आबादी फिर बस सकी।
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पेंच टाइगर रिजर्व से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघिन के प्रस्तावित स्थानांतरण को राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण क्यों माना गया?
वन अधिकारियों के अनुसार पेंच से रामगढ़ विषधारी तक बाघिन का स्थानांतरण राजस्थान का पहला और देश का दूसरा अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण था। इसका उद्देश्य बूंदी स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और आनुवंशिक आधार को मजबूत करना था।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व (RVTR) क्या है और इसे कब अधिसूचित किया गया था?
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिज़र्व (RVTR) राजस्थान के बूंदी ज़िले में स्थित है और इसे 2022 में अधिसूचित किया गया था। यह 1,501 वर्ग किमी में फैला है तथा उत्तर में रणथंभौर टाइगर रिज़र्व और दक्षिण में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व के बीच महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारा बनाता है। इसकी स्थापना राजस्थान में बाघ संरक्षण का दायरा बढ़ाने के लिए की गई।
अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण क्या होता है और RVTR के लिए यह क्यों ज़रूरी है?
अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण में आनुवंशिक विविधता बढ़ाने और कम बाघों वाले क्षेत्र में प्रजनन करने वाली आबादी बसाने के लिए एक जंगली बाघ को एक राज्य के रिज़र्व से दूसरे राज्य के रिज़र्व में ले जाया जाता है। RVTR में अभी कुछ ही बाघ हैं। दूसरी आबादी से बाघ न जुड़ें तो इस छोटी आबादी में अंतःप्रजनन से सेहत गिरने और प्रजनन विफल होने का खतरा रहता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए पेंच (मध्य प्रदेश) से एक बाघिन चुनी गई।
कान्हा-पन्ना बाघ पुनर्स्थापन का पेंच से RVTR के प्रस्तावित स्थानांतरण से क्या संबंध है?
'साशा' नाम की बाघिन को कान्हा से पन्ना ले जाना मध्य प्रदेश के भीतर हुआ था, इसलिए वह अंतरराज्यीय स्थानांतरण नहीं बल्कि बाघ पुनर्स्थापन था। इस कदम से स्थानीय विलुप्ति के बाद पन्ना की बाघ आबादी फिर से बसाने में सफलता मिली। पेंच से RVTR तक प्रस्तावित स्थानांतरण मध्य प्रदेश से राजस्थान में होगा और यह राजस्थान का पहला तथा भारत का दूसरा ऐसा अंतरराज्यीय प्रयास होगा।
बाघ स्थानांतरण में जीपीएस रेडियो-कॉलर की क्या भूमिका है?
जीपीएस रेडियो-कॉलर से स्थानांतरित बाघिन की आवाजाही, नए क्षेत्र में उसके बसने की प्रक्रिया और उसके स्वास्थ्य पर वास्तविक समय में नज़र रखी जा सकती है। इससे वन्यजीव प्रबंधक मानव-वन्यजीव संघर्ष की पहचान करके उसे रोक सकते हैं, उपलब्ध शिकार के अनुसार बाघिन की गतिविधियों पर नज़र रख सकते हैं और उसका विचरण क्षेत्र समझ सकते हैं। बाघिन के किसी बस्ती में पहुँचने पर वे तुरंत हस्तक्षेप भी कर सकते हैं। कॉलर से मिलने वाले आँकड़े भविष्य में बाघ स्थानांतरण की कार्यविधि तय करने में भी उपयोगी होंगे।
भारत में अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण के लिए कौन-सी मंज़ूरी चाहिए?
अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की मंज़ूरी ज़रूरी है। यह प्राधिकरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत काम करता है। NTCA जिस राज्य से बाघ भेजा जाना है और जिस राज्य में उसे लाया जाना है, उन दोनों के वन विभागों के साथ समन्वय करता है। यह शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और प्राकृतिक आवास की उपयुक्तता जाँचने के लिए संयुक्त स्थल आकलन कराता है तथा पर्यावरण से जुड़े पहलुओं और ज़रूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद अंतिम मंज़ूरी देता है।
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