प्रकाशित: 3 सितंबर 2025समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
4 सितंबर 2025 को भारत में आईएमएफ अनुच्छेद-IV मिशन शुरू; मुख्य मुद्रास्फीति घटकर 1.5% पर
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का परामर्श दल 4 सितंबर 2025 को वार्षिक अनुच्छेद-IV परामर्श के लिए नई दिल्ली पहुंचा। मिशन प्रमुख एच. फिंगर के नेतृत्व में इस दल ने आर्थिक मामलों के सचिव ए. ठाकुर, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर एस. मल्होत्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। मिशन के प्रमुख निष्कर्षों में बताया गया कि भारत की मुख्य मुद्रास्फीति सितंबर 2025 में तेजी से घटकर 1.5% रह गई।
आईएमएफ ने भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में फिर से मान्यता देते हुए FY2025-26 के लिए 6.6% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया। मिशन ने जीएसटी 2.0 सुधार, पीएलआई योजना निवेश और RBI के ब्याज दर कटौती चक्र के सकारात्मक प्रभाव को भी रेखांकित किया।
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सितंबर 2025 में अनुच्छेद 4 परामर्श के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर कितनी आँकी?
व्याख्या · सही उत्तर BIMF ने सितंबर 2025 में अपने अनुच्छेद IV परामर्श के दौरान भारत की विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थिति की पुष्टि करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5% की GDP वृद्धि का अनुमान लगाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IMF का अनुच्छेद-IV परामर्श क्या है?
अनुच्छेद-IV परामर्श IMF की किसी सदस्य देश की आर्थिक नीतियों और संभावनाओं की वार्षिक समीक्षा है। IMF कर्मचारी देश का दौरा करते हैं, सरकारी अधिकारियों से चर्चा करते हैं और IMF कार्यकारी बोर्ड को रिपोर्ट सौंपते हैं। इसका नाम IMF के अनुच्छेद IV से लिया गया है।
4 सितंबर 2025 को शुरू हुए IMF अनुच्छेद-IV मिशन के प्रमुख निष्कर्ष क्या थे?
मिशन ने पाया कि भारत की मुख्य मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से कम 1.5% पर है, FY26 के लिए GDP वृद्धि 6.6% अनुमानित है, व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत है और GST 2.0 व PLI जैसे संरचनात्मक सुधार सकारात्मक हैं। भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद उभरते बाजारों में सबसे मजबूत मानी गई।
भारत के लिए 1.5% मुद्रास्फीति क्यों महत्वपूर्ण है?
1.5% की मुख्य मुद्रास्फीति RBI के 2–6% के लक्ष्य दायरे से काफी नीचे है। इतनी कम मुद्रास्फीति खाद्य और ईंधन कीमतों में नरमी को दर्शाती है और मौद्रिक ढील की गुंजाइश बनाती है। हालांकि, यदि यह लगातार निचली सीमा से नीचे रहे तो मांग कमजोरी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए नीति में सावधानी जरूरी है।
PLI योजनाएं क्या हैं और IMF ने इनका विशेष उल्लेख क्यों किया?
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं घरेलू उत्पादन की बढ़ी हुई बिक्री पर आधारित वित्तीय प्रोत्साहन देती हैं। 14 क्षेत्रों में शुरू की गई PLI योजनाएं 'मेक इन इंडिया' को मजबूत बनाती हैं, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को भारत की ओर लाने में मदद करती हैं और आयात निर्भरता कम करती हैं। IMF ने PLI को भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं का महत्वपूर्ण कारक बताया।
सकारात्मक IMF मूल्यांकन से भारत को क्या लाभ होता है?
सकारात्मक IMF मूल्यांकन वैश्विक निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों के बीच भारत की विश्वसनीयता बढ़ाता है, संप्रभु जोखिम धारणा कम करता है, विदेशी पूंजी प्रवाह (FDI व FPI) को बढ़ावा देता है और बहुपक्षीय वार्ताओं में भारत की स्थिति मजबूत करता है। इससे सरकार के सुधारों से जुड़े तर्क को भी वैधता मिलती है।