दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर 2025 के निर्देशों में हैंडसेट निर्माताओं और आयातकों से भारत में उपयोग के लिए बने मोबाइल हैंडसेटों में संचार साथी ऐप पहले से उपलब्ध कराने को कहा था। 3 दिसंबर 2025 को सरकार ने यह अनिवार्यता हटा दी। इसलिए परीक्षा की दृष्टि से मुख्य तथ्य यह है कि संचार साथी को अनिवार्य प्री-इंस्टॉल ऐप नहीं माना जाएगा; यह अब भी स्वैच्छिक साइबर-सुरक्षा ऐप के रूप में उपलब्ध है।

संचार साथी मोबाइल उपयोगकर्ताओं को तीन प्रमुख कामों में मदद करता है। पहला, आईएमईआई के आधार पर हैंडसेट की प्रामाणिकता जांचना। दूसरा, संदिग्ध धोखाधड़ी वाले संचार की रिपोर्ट करना। तीसरा, खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट की सूचना देना। परीक्षा में इसे दूरसंचार-नियमन, साइबर-सुरक्षा और डिजिटल शासन को जोड़ने वाले उदाहरण के रूप में पढ़ना चाहिए। सरकार ने अनिवार्य प्री-इंस्टॉल व्यवस्था हटाई, लेकिन ऐप की उपयोगिता और उपलब्धता बरकरार रखी।

RAS और UPSC जैसे पेपरों में यह तथ्य प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा, दोनों के लिए काम का है। प्रीलिम्स में विभाग, तारीख, ऐप की प्रकृति और उसके उपयोग पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे डिजिटल शासन, नागरिक सुविधा, साइबर धोखाधड़ी से बचाव और नियामकीय निर्णयों में संतुलन के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है। स्टैटिक जीके से इसका लिंक भारत के दूरसंचार क्षेत्र, मोबाइल पहचान व्यवस्था और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं से बनता है। इस अपडेट को पढ़ते समय यह फर्क साफ रखना चाहिए कि 28 नवंबर 2025 का निर्देश प्री-इंस्टॉलेशन से जुड़ा था, जबकि 3 दिसंबर 2025 के बाद अनिवार्यता हट गई और ऐप स्वैच्छिक रूप में जारी रहा।