प्रकाशित: 11 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
भारत को नूर्नबर्ग के बायोफैच 2026 में 'वर्ष का देश' घोषित किया गया — जैविक निर्यात वैश्विक स्तर पर
भारत को बायोफैच 2026 में 'वर्ष का देश' घोषित किया गया। जैविक उत्पादों का यह दुनिया का प्रमुख व्यापार मेला 10 से 13 फरवरी 2026 तक नूर्नबर्ग, जर्मनी में आयोजित हुआ। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भारत की भागीदारी का आयोजन किया। 1,074 वर्ग मीटर में फैले भारत मंडप में 67 सह-प्रदर्शक शामिल थे। इनमें जैविक निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी संस्थाएँ और राज्य सरकारों के निकाय थे।
मंडप में चावल, तिलहन, जड़ी-बूटियाँ, मसाले, दालें, काजू, अदरक, हल्दी, बड़ी इलायची, दालचीनी, आम की प्यूरी और आवश्यक तेल जैसे कई जैविक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इसमें 20 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शकों ने भाग लिया। यह सम्मान 14 वर्ष बाद वैश्विक जैविक क्षेत्र में भारत के नेतृत्व की वापसी का संकेत है। यह यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी होने के समय मिला है। इस समझौते से यूरोपीय बाज़ार में भारत के जैविक खाद्य निर्यात को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत में दुनिया के सबसे अधिक प्रमाणित जैविक उत्पादक हैं। देश में लगभग 44 लाख प्रमाणित जैविक किसान और 55 लाख हेक्टेयर जैविक खेती है। राजस्थान का भी इसमें अहम योगदान है; जैविक मसाले, तिलहन और औषधीय जड़ी-बूटियाँ उसके कृषि निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: बायोफैच 2026, नूरेम्बर्ग में भारत को 'वर्ष का देश' नामित किए जाने के भारत के जैविक निर्यात और यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते की दिशा पर महत्व की परीक्षा करें।
उत्तर (50 शब्द):
भारत को 10-13 फरवरी को नूरेम्बर्ग में बायोफैच 2026 में 'वर्ष का देश' नामित किया गया — 14 वर्षों बाद वैश्विक जैविक नेतृत्व। एपीडा ने 67 सह-प्रदर्शकों के साथ 1,074 वर्ग मीटर का मंडप सजाया। भारत में 44 लाख प्रमाणित जैविक किसान और 55 लाख हेक्टेयर खेती है, जो यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं बढ़ाते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बायोफैच क्या है और बायोफैच 2026 में भारत को 'वर्ष का देश' घोषित किया जाना क्यों महत्वपूर्ण है?
बायोफैच नूर्नबर्ग, जर्मनी में हर साल आयोजित होने वाला दुनिया का प्रमुख जैविक उत्पाद व्यापार मेला है। बायोफैच 2026 में 10–13 फरवरी को भारत को 'वर्ष का देश' घोषित किया जाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारत को इस प्रमुख आयोजन में सबसे बड़ा मंच और मंडप मिला तथा उसकी वैश्विक पहचान बढ़ी। इससे जैविक निर्यात की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की रुचि को सीधे बढ़ावा मिलता है।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) क्या है और बायोफैच 2026 में इसकी क्या भूमिका रही?
APEDA वाणिज्य मंत्रालय के अधीन भारत सरकार की संस्था है, जो कृषि निर्यात को बढ़ावा देती है। बायोफैच 2026 में इसने 1,074 वर्ग मीटर का राष्ट्रीय मंडप लगाया। इसमें 67 सह-प्रदर्शकों ने कई तरह के प्रमाणित जैविक उत्पाद प्रदर्शित किए और APEDA ने भारत की भागीदारी का नेतृत्व किया।
भारत में दुनिया के सबसे अधिक प्रमाणित जैविक किसान क्यों हैं?
भारत में 44 लाख प्रमाणित जैविक किसान हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। यह संख्या देश के विशाल कृषि कार्यबल, जैविक प्रमाणीकरण के फ़ायदों के प्रति बढ़ती जागरूकता, परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) जैसी सरकारी योजनाओं और आदिवासी व वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में रसायनों का कम इस्तेमाल करने वाली पारंपरिक खेती को दर्शाती है।
भारत में कितनी भूमि पर जैविक खेती होती है और वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति क्या है?
भारत में 55 लाख हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती होती है। जैविक खेती के रकबे के मामले में भारत एशिया के सबसे बड़े और दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। यह तेज़ वृद्धि सरकारी सहायता, बढ़ती निर्यात माँग और खासकर सिक्किम, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान जैसे राज्यों के वर्षा पर निर्भर व आदिवासी इलाकों में अधिक भूमि को प्रमाणित जैविक खेती में बदलने से हो रही है।
बायोफैच 2026 में भारत को मिली पहचान से राजस्थान के जैविक कृषि क्षेत्र को क्या लाभ हो सकता है?
राजस्थान में जैविक मसालों—धनिया, जीरा और मेथी—के साथ दालों और तिलहन के उत्पादन व निर्यात की अच्छी संभावनाएँ हैं। बायोफैच 2026 में भारत को मिली पहचान से भारतीय जैविक उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की रुचि बढ़ सकती है। इससे राजस्थान के प्रमाणित जैविक किसानों के लिए नए निर्यात बाज़ार खुल सकते हैं, उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है और अधिक किसान जैविक प्रमाणीकरण अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।