नीति आयोग ने 11 एकीकृत अध्ययन रिपोर्टों की एक महत्वपूर्ण श्रृंखला जारी की, जिसमें भारत के दो दीर्घकालिक लक्ष्यों का विश्लेषण किया गया है: 2047 तक विकसित भारत और 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन। भारत में यह अपनी तरह का पहला बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अध्ययन है, जो सरकार के नेतृत्व में किया गया है और राष्ट्रीय नीति-नियोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
11-खंड की यह श्रृंखला बिजली उत्पादन, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु वित्त और सामाजिक बदलाव जैसे कई क्षेत्रों को शामिल करती है। प्रत्येक खंड विकसित भारत 2047 के लिए जरूरी विकास पथ और नेट जीरो 2070 के लिए जरूरी कार्बन उत्सर्जन घटाने के मार्ग की तुलना करते हुए विस्तृत परिदृश्य विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
बिजली क्षेत्र की रिपोर्ट 2030 तक 500 GW से अधिक और उसके बाद नवीकरणीय ऊर्जा में बड़े विस्तार का विश्लेषण करती है। वित्त पोषण से जुड़ी रिपोर्ट आने वाले दशकों में सैकड़ों लाख करोड़ रुपये की पूंजी आवश्यकताओं का अनुमान लगाती है, जिसमें सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड और मिश्रित वित्त जैसे नए हरित वित्त तंत्रों की जरूरत पर बल दिया गया है। सामाजिक बदलाव वाला खंड न्यायपूर्ण संक्रमण नीतियों के महत्व को रेखांकित करता है, ताकि जीवाश्म ईंधन उद्योगों के श्रमिकों को पीछे न छोड़ा जाए।
11 खंडों को एक साथ जारी करके नीति आयोग यह संकेत देता है कि विकास और जलवायु कार्रवाई को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक लक्ष्य माना जाना चाहिए। ये रिपोर्टें नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र को भारत की 2047 और 2070 प्रतिबद्धताओं के अनुरूप अपने निवेश और नियामकीय निर्णय तय करने में मार्गदर्शन देने के लिए हैं।
